इस्लामाबाद/नई दिल्ली।’ पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने बुधवार को अपनी ही सरकार और देश की पिछली नीतियों पर एक बड़ा और विवादित बयान दिया है। पाकिस्तान की नेशनल असेंबली (संसद) में बोलते हुए आसिफ ने अमेरिका के साथ पाकिस्तान के दशकों पुराने रणनीतिक संबंधों को “एकतरफा और अपमानजनक” बताया। उन्होंने बेहद तल्ख लहजे में कहा कि अमेरिका ने अपने निजी स्वार्थों के लिए पाकिस्तान का इस्तेमाल किया और काम निकल जाने के बाद उसे “टॉयलेट पेपर” की तरह कचरे में फेंक दिया।
“जंग हमारी नहीं, महाशक्तियों की थी”
इस्लामाबाद की एक मस्जिद में हुए हालिया आत्मघाती हमले (जिसमें 31 लोगों की मौत हुई) के बाद आतंकवाद पर हो रही चर्चा के दौरान रक्षा मंत्री ने कहा:
“हमने उन दो युद्धों (अफगान युद्धों) में हिस्सा लिया जो हमारी धरती पर नहीं, बल्कि महाशक्तियों के बीच लड़े गए थे। हमने जिहाद और धर्म के नाम पर अपने लोगों को इस आग में झोंक दिया, लेकिन असलियत यह थी कि यह केवल एक महाशक्ति (अमेरिका) को खुश करने और दो सैन्य तानाशाहों (जिया-उल-हक और परवेज मुशर्रफ) द्वारा अपनी सत्ता को वैधता दिलाने की कोशिश थी।”
9/11 के बाद के फैसलों पर अफसोस
ख्वाजा आसिफ ने 1999 के बाद अमेरिका के साथ दोबारा हाथ मिलाने को पाकिस्तान की सबसे बड़ी ऐतिहासिक गलती करार दिया। उन्होंने कहा कि 9/11 के बाद पाकिस्तान को अमेरिका ने अपनी जरूरतों के लिए “किराए” पर लिया।
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इस्तेमाल और फेंका जाना: आसिफ ने कहा, “जब तक अमेरिका को अफगानिस्तान में हमारी जरूरत थी, वे हमारे दोस्त थे। जैसे ही उनका मतलब पूरा हुआ, उन्होंने हमें ‘टॉयलेट पेपर से भी बदतर’ स्थिति में छोड़ दिया।”
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आतंकवाद का दंश: उन्होंने स्वीकार किया कि आज पाकिस्तान जिस आतंकवाद और आर्थिक बदहाली से जूझ रहा है, वह पिछले तानाशाहों द्वारा लिए गए गलत फैसलों का ‘ब्लोबैक’ (दुष्परिणाम) है।
इतिहास से नहीं सीखा कोई सबक
रक्षा मंत्री ने इस बात पर भी निराशा जताई कि पाकिस्तान ने अपनी गलतियों से कुछ नहीं सीखा। उन्होंने कहा कि देश कभी वॉशिंगटन, कभी मॉस्को तो कभी लंदन की तरफ भागता रहता है, जबकि उसे अपनी संप्रभुता और स्वतंत्र विदेश नीति पर ध्यान देना चाहिए था। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान के शिक्षा पाठ्यक्रम तक को उन युद्धों को सही ठहराने के लिए बदल दिया गया था, जिसकी वैचारिक कीमत आज की पीढ़ी चुका रही है।
बयान के पीछे का राजनीतिक संदेश
जानकारों का मानना है कि ख्वाजा आसिफ का यह बयान पाकिस्तान की बदलती विदेश नीति का संकेत है, जहाँ वह अब अमेरिका से दूरी बनाकर चीन और अन्य क्षेत्रीय शक्तियों के करीब आने की कोशिश कर रहा है। साथ ही, यह बयान देश के भीतर बढ़ रहे अमेरिका विरोधी गुस्से को शांत करने की एक कोशिश भी हो सकता है।

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