Saphala Ekadashi 2025 : हिंदू धर्म में एकादशी का व्रत अत्यंत शुभ माना गया है। साल की अंतिम एकादशियों में से एक सफला एकादशी इस बार 15 दिसंबर, सोमवार को मनाई जाएगी। व्रत रखने वाले भक्तजन 16 दिसंबर को पारण करेंगे। मान्यता है कि इस एकादशी का व्रत व्यक्ति के जीवन में सौभाग्य, समृद्धि और पापों के नाश का मार्ग खोलता है। सफला एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा के साथ-साथ तुलसी माता की पूजा का विशेष महत्व होता है। शास्त्रों में बताया गया है कि इस दिन तुलसी पूजा के कुछ खास नियमों का पालन करने से व्रत के फल कई गुना बढ़ जाते हैं।
सफला एकादशी पर तुलसी पूजा क्यों है विशेष?
तुलसी माता को भगवान विष्णु की प्रिय मान्यता प्राप्त है। कहा जाता है कि:
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तुलसी दल के बिना विष्णु पूजा अधूरी मानी जाती है।
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एकादशी के दिन तुलसी पूजा से व्रतधारी को दोगुना पुण्य प्राप्त होता है।
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तुलसी जल और तुलसी पत्ते मानसिक शुद्धि और आध्यात्मिक ऊर्जाओं को बढ़ाते हैं।
इसलिए सफला एकादशी पर तुलसी की पूजा अवश्य करनी चाहिए।
सफला एकादशी पर तुलसी पूजा की विधि
एकादशी के दिन तुलसी पूजा करते समय इस आसान विधि का पालन करें:
1. सुबह जल्दी उठें
स्नान करके साफ और हल्के रंग के वस्त्र पहनें।
2. पूजा स्थल की सफाई करें
घर के मंदिर या पूजा स्थल को पवित्र करें और दीपक जलाएं।
3. भगवान विष्णु और लक्ष्मी जी की पूजा
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धूप, दीप, चंदन, फल और पंचामृत से विधिवत पूजा करें।
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विष्णु सहस्त्रनाम या गीता का पाठ करना शुभ माना जाता है।
4. तुलसी माता की पूजा
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तुलसी के पौधे पर जल चढ़ाएं।
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धूप-दीप लगाएं और रोली-हल्दी अर्पित करें।
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ओम् तुलस्यै नमः मंत्र का जाप करें।
5. भगवान विष्णु को तुलसी दल अर्पित करें
पूजन के दौरान प्रसाद या भोग में तुलसी दल जरूर शामिल करें, क्योंकि विष्णु जी बिना तुलसी दल के भोग स्वीकार नहीं करते।
एकादशी पारण कब और कैसे करें?
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तारीख: 16 दिसंबर
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सुबह ब्राह्म मुहूर्त में भगवान विष्णु का ध्यान करके पारण करें।
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पहले तुलसी जल ग्रहण करें, फिर हल्का फलाहार करें।
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किसी जरूरतमंद को भोजन या दान देना शुभ माना जाता है।
सफला एकादशी व्रत का महत्व
सफला एकादशी के व्रत से:
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संकट दूर होते हैं
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धन और सौभाग्य की प्राप्ति होती है
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कर्ज मुक्ति के योग बनते हैं
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मन और आत्मा की शुद्धि होती है
शास्त्रों के अनुसार यह एकादशी साधारण व्यक्ति को भी जीवन में श्रेष्ठ फल प्रदान करती है।

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