Surya Grahan 2026 , नई दिल्ली — सनातन धर्म और खगोल विज्ञान में रुचि रखने वालों के लिए आज का दिन बेहद महत्वपूर्ण है। फाल्गुन अमावस्या के अवसर पर आज, 17 फरवरी 2026 को साल का पहला सूर्य ग्रहण लग रहा है। खगोलीय गणनाओं के अनुसार, चंद्रमा आज सूर्य और पृथ्वी के बीच आकर सूर्य की रोशनी को बाधित करेगा। हालांकि, भारतीय समयानुसार यह ग्रहण रात के समय पड़ रहा है, जिसके कारण देश के निवासियों के मन में इसकी दृश्यता और सूतक नियमों को लेकर कई सवाल हैं।
ज्योतिष शास्त्र और खगोल वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि यह वलयाकार सूर्य ग्रहण (Annular Solar Eclipse) मुख्य रूप से अंटार्कटिका, हिंद महासागर और अफ्रीका के कुछ हिस्सों में दिखाई देगा। चूंकि भारत में ग्रहण के समय रात होगी, इसलिए यह यहाँ दिखाई नहीं देगा। शास्त्रों के अनुसार, जो ग्रहण चर्म चक्षुओं से दिखाई नहीं देता, उसका धार्मिक प्रभाव और सूतक काल मान्य नहीं होता है। इसलिए, दिल्ली, मुंबई या रायपुर जैसे शहरों में मंदिरों के कपाट बंद नहीं होंगे और सामान्य पूजा-पाठ जारी रहेगा।
“यह एक खगोलीय घटना है जो दक्षिण गोलार्ध में अधिक प्रभावी रहेगी। भारत में इसका कोई दृश्य प्रभाव नहीं होगा, इसलिए लोगों को घबराने या रोजमर्रा के कामों को रोकने की आवश्यकता नहीं है।”
— डॉ. वी. राजगोपाल, खगोल शास्त्री
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