Baloda Bazar Violence Case : रायपुर, 04 जुलाई। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित बलौदाबाजार कलेक्टोरेट आगजनी और हिंसा मामले में कानूनी प्रक्रिया ने नया मोड़ ले लिया है। मामले में जेल में बंद आरोपी अमित बघेल की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। इससे पहले बिलासपुर हाईकोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद अमित बघेल ने विशेष अनुमति याचिका (SLP) के माध्यम से सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।
हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद पहुंचे सुप्रीम कोर्ट
जानकारी के अनुसार, अमित बघेल ने पहले बिलासपुर हाईकोर्ट में जमानत के लिए आवेदन किया था। हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर कर हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी।
सुप्रीम कोर्ट ने प्रारंभिक सुनवाई के दौरान याचिका पर विचार करते हुए राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है और निर्धारित समय के भीतर अपना जवाब दाखिल करने को कहा है।
सरकार से मांगा गया जवाब
सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जारी नोटिस के बाद अब छत्तीसगढ़ सरकार को इस मामले में अपना पक्ष रखना होगा। सरकार की ओर से जवाब दाखिल होने के बाद सुप्रीम कोर्ट यह तय करेगा कि आरोपी को जमानत दी जाए या नहीं।
फिलहाल अदालत ने जमानत पर कोई अंतिम फैसला नहीं दिया है। मामला अभी सुनवाई की प्रक्रिया में है।
क्या है बलौदाबाजार हिंसा मामला?
बलौदाबाजार जिले में हुई हिंसा और कलेक्टोरेट परिसर में आगजनी की घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था। प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए थे और हालात हिंसक हो गए थे। इस दौरान सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचा और कलेक्टोरेट परिसर में आग लगा दी गई।
घटना के बाद पुलिस ने व्यापक जांच शुरू की और कई लोगों को आरोपी बनाते हुए गिरफ्तार किया। मामले में विभिन्न धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई गई।
कानूनी प्रक्रिया पर टिकी सभी की नजर
सुप्रीम कोर्ट में मामला पहुंचने के बाद अब इस केस की कानूनी प्रक्रिया पर सभी की नजरें टिकी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि राज्य सरकार के जवाब और दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद ही अदालत जमानत याचिका पर अंतिम निर्णय लेगी।
यह मामला पहले से ही संवेदनशील माना जा रहा है, इसलिए अदालत का फैसला भविष्य की कानूनी प्रक्रिया के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट द्वारा नोटिस जारी किए जाने के बाद मामले की अगली सुनवाई में राज्य सरकार अपना पक्ष रखेगी। इसके बाद अदालत उपलब्ध तथ्यों, जांच की स्थिति और दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर फैसला करेगी कि अमित बघेल को जमानत दी जाए या नहीं।

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