CG News : रायपुर, 04 जुलाई। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित एयरपोर्ट की जमीन को लेकर एक बार फिर कानूनी विवाद सुर्खियों में आ गया है। एक किसान ने दावा किया है कि एयरपोर्ट के लिए अधिग्रहित की गई भूमि में उसकी जमीन भी शामिल है, लेकिन उसे नियमानुसार मुआवजा नहीं मिला। इस मामले में किसान ने अब सीधे सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए करीब 3,500 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग की है। मामले की सुनवाई को लेकर कानूनी हलकों के साथ-साथ प्रदेश में भी चर्चा तेज हो गई है।
किसान ने भूमि स्वामित्व का किया दावा
याचिका में किसान ने दावा किया है कि रायपुर एयरपोर्ट के विस्तार और विकास के लिए जिस भूमि का उपयोग किया गया, उसमें उसकी पैतृक जमीन भी शामिल थी। उसका आरोप है कि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया के दौरान उसे उचित मुआवजा नहीं दिया गया और उसके अधिकारों की अनदेखी की गई। इसी आधार पर उसने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर कर न्याय की गुहार लगाई है।
3500 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग
याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से अपनी भूमि के वर्तमान बाजार मूल्य, ब्याज, नुकसान और अन्य दावों को जोड़ते हुए लगभग 3,500 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग की है। इतनी बड़ी राशि की मांग किए जाने के कारण यह मामला काफी चर्चा में है। हालांकि, इस दावे की वैधता और वास्तविकता पर अंतिम निर्णय अदालत की सुनवाई और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर ही होगा।
सुप्रीम कोर्ट में होगी मामले की सुनवाई
मामला अब सुप्रीम कोर्ट के समक्ष विचाराधीन है। अदालत में दोनों पक्ष अपने-अपने दस्तावेज और तर्क पेश करेंगे। यदि न्यायालय आवश्यक समझता है तो राज्य सरकार, संबंधित विभागों और अन्य पक्षों से भी जवाब तलब किया जा सकता है। फिलहाल मामले पर अंतिम निर्णय आना बाकी है।
सरकार और संबंधित विभागों की नजर
मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार और संबंधित विभाग भी कानूनी प्रक्रिया पर नजर बनाए हुए हैं। यदि अदालत की ओर से कोई निर्देश जारी किया जाता है तो उसके अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल सरकार की ओर से इस मामले में विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भूमि अधिग्रहण से जुड़े मामलों में राजस्व रिकॉर्ड, अधिग्रहण की प्रक्रिया, स्वामित्व संबंधी दस्तावेज और पूर्व में दिए गए मुआवजे जैसे पहलुओं की विस्तृत जांच की जाती है। ऐसे मामलों में अंतिम फैसला अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों और कानूनी प्रावधानों के आधार पर ही होता है।
फिलहाल यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है और सुप्रीम कोर्ट के अंतिम निर्णय के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि किसान का दावा कितना उचित है और उसे किसी अतिरिक्त मुआवजे का अधिकार बनता है या नहीं।

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