पहाड़ों के बीच पानी के लिए रोज की जंग
अंबिकापुर और आसपास के पहाड़ी कोरवा क्षेत्रों में गर्मी बढ़ते ही पानी सबसे बड़ी चुनौती बन जाता है। कई गांवों में महिलाएं सुबह होने से पहले खाली बर्तन लेकर निकलती हैं। कहीं झरनों का सहारा, तो कहीं सूखते कुओं के भरोसे जिंदगी चल रही है। अब प्रशासन ने इन हालात को बदलने की तैयारी शुरू कर दी है। अधिकारियों के मुताबिक, जिन बसाहटों में पेयजल संकट सबसे ज्यादा है, वहां प्राथमिकता के आधार पर बोरवेल और हैंडपंप लगाए जाएंगे। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई इलाकों में बरसात खत्म होते ही पानी की परेशानी शुरू हो जाती है। बच्चों की पढ़ाई और महिलाओं की दिनचर्या तक प्रभावित होती है। ऐसे में यह योजना गांवों के लिए बड़ी राहत मानी जा रही है।
ग्राउंड पर दिखने लगा असर
ग्रामीण इलाकों में सर्वे का काम तेज कर दिया गया है। तकनीकी टीमों ने कई संभावित स्थान चिन्हित किए हैं। प्रशासन का दावा है कि काम को तय समय सीमा के भीतर पूरा करने की कोशिश होगी। गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि पहले लोग नदी और पहाड़ी झरनों से पानी लाते थे। गर्मियों में हालत और खराब हो जाती थी। “जब टैंकर नहीं पहुंचता था, तब पूरा गांव परेशान हो जाता था,” एक ग्रामीण ने बताया।शाम ढलते वक्त पहाड़ी रास्तों पर पानी से भरे मटकों के साथ लौटती महिलाओं की तस्वीर यहां आम रही है। अब गांव वालों को उम्मीद है कि यह तस्वीर धीरे-धीरे बदलेगी।

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