Vrishabha Sankranti 2026 : नई दिल्ली।’ हिंदू कैलेंडर में संक्रांति का विशेष महत्व है। जब सूर्य एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं, तो उसे ‘संक्रांति’ कहा जाता है। मई के महीने में सूर्य देव अपनी उच्च राशि मेष को छोड़कर वृषभ राशि में प्रवेश करने जा रहे हैं। इस दिन को वृषभ संक्रांति के रूप में मनाया जाएगा।
धार्मिक दृष्टिकोण से यह दिन सूर्य उपासना, दान-पुण्य और पितृ तर्पण के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
वृषभ संक्रांति की तिथि और शुभ मुहूर्त
वैदिक पंचांग की गणना के अनुसार, सूर्य देव का राशि परिवर्तन मध्य मई में होने जा रहा है:
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संक्रांति तिथि: 15 मई, शुक्रवार
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पुण्य काल: सूर्योदय के बाद से लेकर दोपहर तक का समय दान और स्नान के लिए सर्वोत्तम है।
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विशेष संयोग: वृषभ संक्रांति पर सूर्य देव की पूजा करने से जातकों के आत्मविश्वास और कार्यक्षेत्र (करियर) में उन्नति के योग बनते हैं।
पूजा विधि: ऐसे करें सूर्य देव को प्रसन्न
वृषभ संक्रांति के दिन श्रद्धालु इन चरणों का पालन कर विशेष फल प्राप्त कर सकते हैं:
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पवित्र स्नान: इस दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर किसी पवित्र नदी या घर पर ही गंगाजल मिलाकर स्नान करना चाहिए।
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सूर्य को अर्घ्य: तांबे के लोटे में जल, लाल चंदन, अक्षत और लाल फूल डालकर उगते सूर्य को अर्घ्य दें। अर्घ्य देते समय ‘ॐ सूर्याय नमः’ मंत्र का जाप करें।
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दान का महत्व: इस दिन जरूरतमंदों को अनाज, गुड़, तांबे के बर्तन और लाल वस्त्र दान करना अत्यंत लाभकारी माना जाता है।
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व्रत व साधना: कई लोग इस दिन सूर्य देव के निमित्त व्रत भी रखते हैं, जिससे मान-सम्मान और आरोग्य की प्राप्ति होती है।
धार्मिक व ज्योतिषीय महत्व
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, वृषभ संक्रांति से ग्रीष्म ऋतु का प्रभाव और अधिक बढ़ जाता है। सूर्य का वृषभ (पृथ्वी तत्व की राशि) में प्रवेश कृषि और व्यापार जगत के लिए महत्वपूर्ण बदलाव लेकर आता है। मान्यता है कि इस दिन जो भी व्यक्ति सच्चे मन से आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करता है, उसे शत्रुओं पर विजय और सरकारी कार्यों में सफलता प्राप्त होती है।

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