Divine Law Of Dates : नई दिल्ली | 30 अप्रैल, 2026 हिंदू पंचांग में समय की गणना का आधार तिथियां हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महीने की 30 तिथियां अलग-अलग शक्तियों को समर्पित हैं। यदि जातक तिथि के अनुसार संबंधित देवी-देवता की उपासना करता है, तो उसे न केवल मानसिक शांति मिलती है, बल्कि उसकी विशिष्ट मनोकामनाएं भी पूर्ण होती हैं।
पक्ष के प्रथम चरण की पूजा (प्रतिपदा से पंचमी)
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प्रतिपदा (पड़वा): इस तिथि के स्वामी अग्निदेव हैं। इनकी पूजा से घर में धन-धान्य और यश की वृद्धि होती है।
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द्वितीया: इसके अधिष्ठाता ब्रह्मा जी हैं। विद्या और ज्ञान की प्राप्ति के लिए इस दिन ब्रह्म देव की उपासना श्रेष्ठ मानी जाती है।
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तृतीया: यह तिथि माता गौरी और कुबेर जी को समर्पित है। सौभाग्य और सुख-समृद्धि के लिए इस दिन इनका पूजन करना चाहिए।
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चतुर्थी: भगवान गणेश इस तिथि के स्वामी हैं। सभी विघ्नों को दूर करने के लिए चतुर्थी पर ‘विघ्नहर्ता’ का पूजन सर्वोत्तम है।
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पंचमी: इस तिथि के स्वामी नाग देवता हैं। सर्प भय से मुक्ति और कालसर्प दोष के निवारण हेतु इस दिन नाग पूजन किया जाता है।
मध्य चरण की उपासना (षष्ठी से दशमी)
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षष्ठी: भगवान शिव के पुत्र कार्तिकेय (स्कंद) इस तिथि के स्वामी हैं। शत्रुओं पर विजय और तेज बुद्धि के लिए इनका पूजन करें।
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सप्तमी: यह तिथि सूर्य देव को समर्पित है। उत्तम स्वास्थ्य और नेत्र ज्योति के लिए सप्तमी पर सूर्य को जल अर्पण करना लाभकारी है।
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अष्टमी: इस तिथि की स्वामिनी माता दुर्गा हैं। शक्ति की उपासना और कष्टों के निवारण के लिए यह तिथि विशेष है।
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नवमी: इस तिथि पर माँ दुर्गा और भगवान राम की पूजा का विधान है। कठिन बाधाओं को पार करने के लिए यह फलदायी है।
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दशमी: इस तिथि के स्वामी यमराज और दिग्पाल माने गए हैं। अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति के लिए इनका स्मरण किया जाता है।
अंतिम चरण और पूर्णता (एकादशी से पूर्णिमा/अमावस्या)
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एकादशी: यह तिथि भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है। मोक्ष प्राप्ति और पापों के नाश के लिए एकादशी का व्रत व पूजन सर्वश्रेष्ठ है।
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द्वादशी: इसके स्वामी भी भगवान विष्णु हैं। इस दिन विशेष रूप से वामन अवतार की पूजा की जाती है।
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त्रयोदशी: इस तिथि के अधिष्ठाता कामदेव हैं। आरोग्य और सुंदरता की प्राप्ति के लिए इस दिन पूजन का विधान है।
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चतुर्दशी: यह तिथि भगवान शिव को समर्पित है। शिवरात्रि (मासिक) इसी दिन पड़ती है, जिसमें शिव कृपा से सब सिद्ध होता है।
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पूर्णिमा: इस तिथि के स्वामी चंद्रमा हैं। मानसिक शांति और लक्ष्मी प्राप्ति के लिए इस दिन चंद्र देव व श्री सत्यनारायण की पूजा की जाती है।
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अमावस्या: यह तिथि पितरों को समर्पित है। पूर्वजों की शांति और आशीर्वाद के लिए इस दिन तर्पण और दान करना पुण्यदायी माना जाता है।

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