एक निर्णायक क्षण: 16 अप्रैल को संसद में चर्चा
मुख्यमंत्री साय ने अपने पत्र में 16 अप्रैल 2026 को संसद में इस अधिनियम पर प्रस्तावित चर्चा को देश के लोकतांत्रिक इतिहास का एक महत्वपूर्ण और निर्णायक क्षण बताया। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह चर्चा मातृशक्ति को लोकतांत्रिक संस्थाओं में समुचित प्रतिनिधित्व दिलाने की दिशा में एक ऐतिहासिक अवसर है, जिसे सफल बनाने के लिए सभी का सहयोग अनिवार्य है। मुख्यमंत्री ने सभी जनप्रतिनिधियों और महिला संगठनों से इस चर्चा को सार्थक बनाने और इसके माध्यम से महिलाओं के सशक्तिकरण के मार्ग को प्रशस्त करने के लिए सक्रिय भागीदारी निभाने का आग्रह किया है। यह न केवल महिलाओं के लिए एक बड़ी जीत होगी, बल्कि देश के लोकतंत्र को भी और अधिक मजबूत और समावेशी बनाएगी।
“नारी शक्ति वंदन अधिनियम का प्रभावी क्रियान्वयन हमारी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है। यह केवल एक कानून नहीं है, बल्कि यह हमारी आधी आबादी के प्रति हमारे सम्मान और विश्वास का प्रतीक है। हम छत्तीसगढ़ में इसे पूरी निष्ठा और समयबद्धता के साथ लागू करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इसके लिए हम सभी सांसदों, विधायकों और महिला संगठनों के साथ मिलकर काम करेंगे, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि इस अधिनियम का लाभ हर महिला तक पहुंचे। हम एक ऐसा छत्तीसगढ़ बनाएंगे जहां महिलाओं को हर क्षेत्र में आगे बढ़ने के समान अवसर मिलेंगे।”
— विष्णु देव साय, मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़
2026 में होने वाले इस ऐतिहासिक क्रियान्वयन ने प्रदेश की राजनीति में भी हलचल पैदा कर दी है। मुख्यमंत्री साय की इस अपील ने सभी राजनीतिक दलों को इस मुद्दे पर एकजुट होने के लिए प्रेरित किया है। यह न केवल महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को बढ़ाएगा, बल्कि प्रदेश के विकास में भी महिलाओं की भागीदारी को सुनिश्चित करेगा। सरकार इस अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर रही है, जिसमें सभी हितधारकों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। आने वाले दिनों में और भी बड़ी रिकवरी संभव है। पुलिस ने साफ किया है कि नशे के खिलाफ यह अभियान अनवरत जारी रहेगा। अगर स्थिति और बिगड़ती है, तो विभाग को केंद्र सरकार से मदद मांगनी पड़ सकती है।

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