ट्रंप का सख्त रुख: “ईरानी तेल का एक कतरा भी बाहर नहीं जाएगा”
व्हाइट हाउस से जारी आदेश के बाद, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने होर्मुज के पूर्वी इलाके में 15 अत्याधुनिक युद्धपोत तैनात किए हैं। इनमें गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर्स और घातक एयरक्राफ्ट कैरियर शामिल हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया पर साफ चेतावनी दी है कि अमेरिकी नौसेना हर उस जहाज को इंटरसेप्ट करेगी जो ईरान को टोल टैक्स दे रहा है या वहां से तेल लेकर निकल रहा है।
इस बीच, समुद्र के बीचों-बीच भारतीय झंडे वाले एक जहाज की मौजूदगी ने स्थिति को और तनावपूर्ण बना दिया है। हालांकि, तेहरान में भारतीय दूतावास और ईरानी अधिकारियों के बीच इस जहाज की सुरक्षित निकासी को लेकर बातचीत जारी है। बता दें कि 28 फरवरी से शुरू हुए इस संकट में अब तक 20 से अधिक कमर्शियल जहाजों पर हमले हो चुके हैं।
“हमने तेहरान को अपना अंतिम और सर्वश्रेष्ठ प्रस्ताव दिया था, लेकिन उन्होंने इसे ठुकरा दिया। अब बातचीत का समय खत्म हो चुका है, अब कार्रवाई का समय है। हम अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र को ईरान की जागीर नहीं बनने देंगे।”
— जे.डी. वेंस, अमेरिकी उपराष्ट्रपति (पाकिस्तान में वार्ता विफल होने के बाद)
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग 20% हिस्सा संभालता है। इस नाकेबंदी का सीधा असर वैश्विक तेल कीमतों पर पड़ना तय है। भारत के लिए यह दोहरा संकट है: पहला, ऊर्जा सुरक्षा और दूसरा, इस क्षेत्र में काम कर रहे भारतीय नाविकों की जान। अब तक 9 भारतीय जहाजों ने इस खतरे के बीच से अपनी यात्रा पूरी की है, लेकिन अमेरिकी नाकेबंदी के बाद अब जोखिम कई गुना बढ़ गया है।

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