नई दिल्ली/तेहरान: ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी युद्ध अब मध्य पूर्व की सीमाओं को लांघकर हिंद महासागर तक पहुंच गया है। शनिवार तड़के ईरान ने चागोस द्वीप समूह में स्थित अमेरिका और ब्रिटेन के रणनीतिक सैन्य अड्डे डिएगो गार्सिया पर दो मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें दागकर सनसनी फैला दी। हालांकि, ये मिसाइलें अपने लक्ष्य को भेदने में नाकाम रहीं, लेकिन इस हमले ने ईरान की उस सैन्य क्षमता को उजागर कर दिया है जिसे अब तक दुनिया से छिपाकर रखा गया था।
कैसे हुआ हमला?
वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) और ईरानी एजेंसी के अनुसार:
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दो मिसाइलें: ईरान ने दो इंटरमीडिएट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं।
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विफलता: एक मिसाइल उड़ान के दौरान ही तकनीकी खराबी के कारण क्रैश हो गई।
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इंटरसेप्शन: दूसरी मिसाइल को नष्ट करने के लिए अमेरिकी नौसेना के एक युद्धपोत ने SM-3 इंटरसेप्टर दागा। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि इंटरसेप्शन सफल रहा या मिसाइल खुद ही समुद्र में गिर गई।
4000 KM की दूरी और ईरान का ‘झूठ’
यह हमला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि डिएगो गार्सिया ईरान की मुख्य भूमि से लगभग 4,000 किलोमीटर दूर है।
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दावे बनाम हकीकत: पिछले महीने ही ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने दावा किया था कि ईरान ने अपनी मिसाइल रेंज को 2,000 किलोमीटर तक सीमित कर दिया है।
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नई क्षमता: 4,000 किमी तक प्रहार करने की कोशिश ने यह साबित कर दिया है कि ईरान के पास अब ऐसी मिसाइलें (संभवतः खुर्रमशहर-4 का उन्नत संस्करण) हैं जो न केवल पूरे मध्य पूर्व, बल्कि यूरोप के कुछ हिस्सों और हिंद महासागर के सुदूर द्वीपों तक पहुंचने में सक्षम हैं।
डिएगो गार्सिया को ही क्यों चुना?
डिएगो गार्सिया अमेरिकी वायु सेना का सबसे महत्वपूर्ण ‘फॉरवर्ड बेस’ है।
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यहीं से अमेरिका के B-52 और B-2 स्टील्थ बॉम्बर्स ईरान पर हमले के लिए उड़ान भरते हैं।
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ईरान ने यह हमला ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर द्वारा अमेरिका को डिएगो गार्सिया बेस के इस्तेमाल की अनुमति देने के कुछ ही घंटों बाद किया। ईरान ने इसे “आत्मरक्षा में की गई कार्रवाई” करार दिया है।

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