नई दिल्ली/बेंगलुरु: भारत के महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष कार्यक्रम ‘चंद्रयान-4’ को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने मिशन की लॉन्चिंग से करीब दो साल पहले ही चंद्रमा पर लैंडिंग के लिए सटीक जगह की पहचान कर ली है। यह मिशन न केवल भारत बल्कि दुनिया भर के वैज्ञानिकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है क्योंकि इस बार भारत चांद की सतह से मिट्टी और चट्टानों के नमूने (Samples) धरती पर वापस लेकर आएगा।
दक्षिणी ध्रुव पर फिर होगी सफल दस्तक
इसरो के अनुसार, चंद्रयान-4 को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव (South Pole) क्षेत्र में उतारा जाएगा। यह वही इलाका है जहां चंद्रयान-3 ने सफल लैंडिंग कर इतिहास रचा था। हालांकि, इस बार लैंडिंग साइट अधिक चुनौतीपूर्ण और वैज्ञानिक रूप से समृद्ध क्षेत्र में चुनी गई है।
मिशन की मुख्य विशेषताएं
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सैंपल रिटर्न मिशन: यह भारत का पहला ऐसा मिशन होगा जो चांद पर जाकर वहां से अवशेष लेकर वापस लौटेगा।
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जटिल प्रक्रिया: इसरो अध्यक्ष वी. नारायणन के अनुसार, यह अब तक का सबसे जटिल मिशन होगा क्योंकि इसमें स्पेसक्राफ्ट को चांद की सतह से वापस लॉन्च करना और पृथ्वी के वायुमंडल में सुरक्षित प्रवेश कराना शामिल है।
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लॉन्च का लक्ष्य: इसरो ने इस मिशन के लिए 2028 का लक्ष्य रखा है।
क्यों खास है यह मिशन?
अभी तक केवल अमेरिका, रूस और चीन ही चंद्रमा से नमूने वापस लाने में सफल रहे हैं। चंद्रयान-4 की सफलता के साथ भारत इस एलीट क्लब में शामिल हो जाएगा। ये नमूने चंद्रमा की उत्पत्ति, वहां मौजूद पानी के अणुओं और भविष्य में मानव बस्तियों की संभावनाओं को समझने में मदद करेंगे।
“हम चंद्रयान-4 के लिए 2028 का लक्ष्य रख रहे हैं। यह एक बहु-चरणीय मिशन होगा जो हमारी तकनीकी क्षमता को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।” — वी. नारायणन, अध्यक्ष, इसरो



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