अलनार गांव में तनाव की मुख्य वजह
जानकारी के अनुसार, अलनार गांव में पिछले कुछ समय से स्थानीय रीति-रिवाजों और पंथ परिवर्तन को लेकर अंदरूनी मतभेद चल रहे थे। ग्रामीणों का आरोप है कि ये तीन परिवार लंबे समय से अपनी पारंपरिक मान्यताओं को छोड़कर अन्य धर्म की प्रार्थनाओं में शामिल हो रहे थे। मंगलवार सुबह गांव में एक बैठक बुलाई गई, जिसमें इन परिवारों की उपस्थिति पर आपत्ति जताई गई। बात बढ़ने पर ग्रामीणों ने सामूहिक निर्णय लेकर उन्हें तत्काल गांव छोड़ने का अल्टीमेटम दे दिया।
पीड़ित परिवारों का आरोप है कि उन्हें डराया-धमकाया गया और उनके दैनिक उपयोग के सामान के साथ गांव की सीमा से बाहर कर दिया गया। वर्तमान में ये परिवार अपने रिश्तेदारों या अन्य सुरक्षित स्थानों पर शरण लिए हुए हैं।
प्रशासनिक और स्थानीय प्रतिक्रिया
“हमें अलनार गांव में सामाजिक बहिष्कार और परिवारों को बाहर निकालने की सूचना मिली है। पुलिस टीम को मौके पर भेजा गया है। शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए दोनों पक्षों से चर्चा की जा रही है। किसी को भी कानून हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी।”
— स्थानीय पुलिस अधिकारी, अमाबेड़ा थाना
क्षेत्र की वर्तमान स्थिति और नागरिकों पर प्रभाव
कांकेर के वनांचल क्षेत्रों में धर्मांतरण को लेकर पहले भी टकराव की स्थितियां निर्मित होती रही हैं। इस घटना के बाद अलनार और आसपास के गांवों में दहशत का माहौल है। अंतागढ़-अमाबेड़ा मार्ग पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है। जिला प्रशासन के अधिकारी और स्थानीय पंचायत प्रतिनिधि मामले को सुलझाने के लिए गांव के बुजुर्गों के साथ बैठक कर रहे हैं।
स्थानीय बाजार और आवाजाही फिलहाल सामान्य है, लेकिन गांव के भीतर बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश पर ग्रामीण नजर रख रहे हैं। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी सोशल मीडिया अफवाह पर ध्यान न दें और शांति बनाए रखें। प्रशासन अब उन तीन परिवारों की घर वापसी के लिए सुरक्षित माहौल तैयार करने की कोशिश कर रहा है।

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