CGPSC Scam , रायपुर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) भर्ती घोटाले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने जांच को निर्णायक मोड़ पर पहुंचाते हुए शुक्रवार को 13 आरोपियों के खिलाफ करीब 400 पन्नों का चालान अदालत में पेश कर दिया है। इस कार्रवाई के बाद प्रदेश के सबसे चर्चित भर्ती घोटालों में से एक में जल्द और सख्त कानूनी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।
CGPSC Scam : CGPSC भर्ती घोटाला CBI ने 400 पन्नों का चालान किया पेश, फरार आरोपी उत्कर्ष चंद्राकर की गिरफ्तारी जल्द

CBI द्वारा पेश चालान में CGPSC की भर्ती प्रक्रिया में बड़े स्तर पर हुई गड़बड़ियों, साजिश और पद के दुरुपयोग का विस्तृत विवरण शामिल है। एजेंसी का दावा है कि चयन प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए संगठित तरीके से नियमों की अनदेखी की गई और अपात्र अभ्यर्थियों को लाभ पहुंचाया गया।
जेल में बंद आरोपियों में CGPSC के तत्कालीन चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी, आयोग से जुड़ी आरती वासनिक, उद्योगपति बजरंग पावर एंड इस्पात के तत्कालीन निदेशक श्रवण कुमार गोयल, उनके CGPSC से चयनित बेटे शशांक गोयल, बहू भूमिका कटियार और साहिल सोनवानी जैसे नाम शामिल हैं। CBI के अनुसार, इन सभी की भूमिका भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं और प्रभाव का इस्तेमाल करने से जुड़ी हुई पाई गई है।

बताया गया है कि इस समय मामले में 12 आरोपी न्यायिक हिरासत में जेल में बंद हैं, जबकि उत्कर्ष चंद्राकर नामक एक आरोपी अभी फरार है। CBI ने चालान में स्पष्ट किया है कि उत्कर्ष चंद्राकर की भूमिका परीक्षा में गड़बड़ी कराने और चयन प्रक्रिया को प्रभावित करने में अहम रही है। एजेंसी ने संकेत दिए हैं कि उसकी गिरफ्तारी जल्द की जाएगी, इसके लिए लगातार दबिश दी जा रही है।
CBI सूत्रों के अनुसार, चार्जशीट में कॉल डिटेल्स, दस्तावेजी साक्ष्य, डिजिटल रिकॉर्ड और गवाहों के बयान शामिल किए गए हैं, जो यह दर्शाते हैं कि भर्ती प्रक्रिया को सुनियोजित तरीके से प्रभावित किया गया। इस घोटाले के सामने आने के बाद CGPSC की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए थे।

चालान पेश होने के बाद अब अदालत में ट्रायल की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं। CGPSC भर्ती घोटाले को लेकर प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में पहले से ही हलचल मची हुई है, और अब CBI की इस कार्रवाई ने मामले को और गंभीर बना दिया है।
फिलहाल, सभी की नजरें फरार आरोपी उत्कर्ष चंद्राकर की गिरफ्तारी और आगे की न्यायिक कार्रवाई पर टिकी हुई हैं, जिससे यह बहुचर्चित घोटाला अपने अंजाम तक पहुंच सके।
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