Gautam Gambhir’ नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर पिछले कुछ समय से लगातार चर्चा के केंद्र में हैं। टीम के प्रदर्शन को लेकर चाहे नतीजे सकारात्मक रहे हों या नकारात्मक, आलोचनाओं का बड़ा हिस्सा गंभीर की ओर ही जाता दिखाई देता है। लगातार दो आईसीसी खिताब जीतने वाले पहले भारतीय मुख्य कोच बनने के बावजूद उन पर सवाल उठ रहे हैं। हाल के दिनों में युवा खिलाड़ी वैभव को मौका देने, संजू सैमसन को प्लेइंग इलेवन से बाहर रखने और ड्रेसिंग रूम में कथित मतभेद जैसी चर्चाओं ने इस बहस को और तेज कर दिया है।
वैभव के डेब्यू पर क्यों छिड़ी बहस?
भारतीय टीम में युवा प्रतिभाओं को मौका देने की रणनीति को लेकर भी गंभीर आलोचनाओं के घेरे में हैं। वैभव को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मौका दिए जाने के फैसले पर क्रिकेट विशेषज्ञों और प्रशंसकों की अलग-अलग राय सामने आई है।
एक वर्ग का मानना है कि युवा खिलाड़ियों को समय रहते अवसर देना भविष्य के लिए जरूरी है, जबकि दूसरे वर्ग का कहना है कि अनुभव और प्रदर्शन के आधार पर चयन होना चाहिए। हालांकि टीम चयन का अंतिम फैसला चयन समिति और टीम प्रबंधन की सामूहिक प्रक्रिया का हिस्सा होता है, इसलिए किसी एक व्यक्ति को इसका पूरा जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं माना जाता।
संजू सैमसन को लेकर लगातार उठ रहे सवाल
विकेटकीपर-बल्लेबाज संजू सैमसन को टीम से बाहर रखने का मुद्दा भी लगातार चर्चा में बना हुआ है। उनके समर्थकों का कहना है कि अच्छे प्रदर्शन के बावजूद उन्हें पर्याप्त मौके नहीं मिलते।
हालांकि टीम प्रबंधन का तर्क रहा है कि प्लेइंग इलेवन का चयन विपक्ष, पिच की परिस्थितियों, टीम संयोजन और रणनीति को ध्यान में रखकर किया जाता है। ऐसे में हर मैच में सभी खिलाड़ियों को शामिल करना संभव नहीं होता।
क्या टीम में अंदरूनी कलह है?
सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्टों में समय-समय पर भारतीय टीम के ड्रेसिंग रूम में मतभेद और अंदरूनी कलह की चर्चाएं सामने आती रही हैं। हालांकि अब तक भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) या टीम प्रबंधन की ओर से ऐसी किसी गंभीर आंतरिक समस्या की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े टूर्नामेंटों और लगातार व्यस्त कार्यक्रम के दौरान टीम के भीतर रणनीतिक मतभेद होना सामान्य बात है, लेकिन इन्हें हमेशा विवाद या कलह के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
जीत के बाद भी आलोचना क्यों?
गौतम गंभीर अपने स्पष्ट विचारों और आक्रामक क्रिकेट सोच के लिए जाने जाते हैं। उनके फैसले अक्सर चर्चा का विषय बनते हैं। समर्थकों का कहना है कि जब टीम जीतती है तो उसका श्रेय पूरे दल को मिलता है, लेकिन हार या विवाद की स्थिति में सबसे पहले कोच को निशाना बनाया जाता है।
वहीं आलोचकों का मानना है कि टीम चयन, रणनीति और खिलाड़ियों के उपयोग जैसे फैसलों पर सवाल उठाना खेल का स्वाभाविक हिस्सा है।

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