क्या है मामला
सुनवाई के दौरान WhatsApp की डेटा शेयरिंग नीति पर सवाल उठे। अदालत ने कहा कि उपयोगकर्ताओं की निजी जानकारी का इस्तेमाल या साझा करना संवैधानिक अधिकारों के दायरे में आता है। पीठ ने साफ संकेत दिए कि डेटा के नाम पर मनमानी स्वीकार नहीं की जाएगी।
अदालत की सख्त टिप्पणी
“नागरिकों की निजता सर्वोपरि है। अदालत WhatsApp को किसी भी तरह की जानकारी किसी अन्य कंपनी के साथ साझा करने की खुली छूट नहीं दे सकती।”
— न्यायमूर्ति सूर्यकांत, सुप्रीम कोर्ट
देशभर के यूजर्स पर असर
इस टिप्पणी का असर सीधे WhatsApp उपयोगकर्ताओं पर पड़ेगा। अदालत के रुख से यह साफ है कि डेटा सुरक्षा पर निगरानी और सख्त होगी। आने वाली सुनवाइयों में नीति में बदलाव या अतिरिक्त दिशानिर्देश सामने आ सकते हैं। टेक कंपनियों को अब डेटा प्राइवेसी कानून के तहत जवाब देना होगा।

More Stories
Census 2027: नाम, जाति, धर्म, आधार और बैंक खाते… जानिए जनगणना के 40 सवाल
NALSAR Controversy: छात्रों के समर्थन में सुप्रीम कोर्ट, BCI के आदेश पर CJI सूर्यकांत ने उठाए सवाल
Air India फुकेत-दिल्ली फ्लाइट में बड़ा खुलासा’ 4 सेकेंड तक पायलट के कंट्रोल से बाहर हुआ विमान