Vaishakh Month 2026 : नई दिल्ली | हिंदू पंचांग के अनुसार, साल का दूसरा महीना ‘वैशाख’ शुरू हो चुका है, जो इस वर्ष 1 मई 2026 तक चलेगा। स्कंद पुराण के अनुसार, वैशाख के समान कोई मास नहीं है, न सतयुग के समान कोई युग है और न वेद के समान कोई शास्त्र। मान्यता है कि इस माह में किए गए दान और पुण्य से न केवल सुख-समृद्धि आती है, बल्कि जन्मों की दरिद्रता का भी नाश होता है।
शास्त्रों के अनुसार, वैशाख मास में पूजा के इन 5 नियमों का पालन करना अत्यंत फलदायी माना गया है:
1. सूर्योदय से पूर्व स्नान का संकल्प
वैशाख मास में जल का महत्व सबसे अधिक है। इस महीने ब्रह्म मुहूर्त में किसी पवित्र नदी, सरोवर या घर पर ही गंगाजल डालकर स्नान करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है। स्नान के बाद भगवान विष्णु को अर्घ्य देना सौभाग्य में वृद्धि करता है।
2. तुलसी पूजन और दीपदान
भगवान विष्णु को तुलसी अत्यंत प्रिय है। वैशाख में प्रतिदिन तुलसी के पौधे में जल अर्पित करें और संध्याकाल में शुद्ध घी का दीपक जलाएं। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है और आर्थिक तंगी दूर होती है।
3. ‘जल दान’ है सबसे बड़ा पुण्य
इस महीने में प्यासों को पानी पिलाने का फल राजसूय यज्ञ के समान बताया गया है। राहगीरों के लिए प्याऊ लगवाना, पशु-पक्षियों के लिए दाना-पानी रखना और मटके (घड़े) का दान करना दरिद्रता को जड़ से खत्म करने वाला माना जाता है।
4. श्री हरि और लक्ष्मी की संयुक्त पूजा
वैशाख माह में ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करते हुए भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें। इस दौरान पीले फल, पीले फूल और पंचामृत का भोग लगाएं। यह नियम घर की सुख-शांति के लिए रामबाण माना जाता है।
5. सत्तू और मौसमी फलों का दान
गर्मी के प्रारंभ के इस महीने में सत्तू, गुड़, तिल और रसीले फलों (जैसे आम, खरबूजा) का दान करना चाहिए। मान्यता है कि वैशाख में अन्न और जल का दान करने से पितृ दोषों से मुक्ति मिलती है और कुंडली के अशुभ ग्रह शांत होते हैं।

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