इस्लामाबाद/नई दिल्ली: पाकिस्तान की मध्यस्थता में चल रही अमेरिका और ईरान के बीच उच्च स्तरीय परमाणु वार्ता (Nuclear Talks) बिना किसी ठोस नतीजे के समाप्त हो गई है। रविवार को अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस 21 घंटे की सघन चर्चा के बाद अचानक इस्लाबाद छोड़कर अमेरिका के लिए रवाना हो गए। इस वार्ता का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच जारी तनाव को कम करना और एक स्थायी संघर्ष विराम तक पहुँचना था, लेकिन ईरान द्वारा परमाणु हथियारों से जुड़ी अनिवार्य शर्तों को स्वीकार न करने के कारण बातचीत बीच में ही टूट गई।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने रवानगी से पहले स्पष्ट किया कि शांति समझौते के विफल होने की सबसे बड़ी वजह ईरान का अड़ियल रवैया है। वेंस के अनुसार, “हमने शांति के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ और अंतिम प्रस्ताव (Final and Best Offer) पेश किया था, लेकिन ईरान परमाणु हथियारों को पूरी तरह त्यागने की प्रतिबद्धता जताने को तैयार नहीं है।” उन्होंने जोर देकर कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का मुख्य लक्ष्य क्षेत्र को परमाणु मुक्त बनाना है, जिस पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता।
दूसरी ओर, ईरान ने वार्ता विफल होने का ठीकरा अमेरिका पर फोड़ा है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिका उन पर अतार्किक और बेतुकी शर्तें थोपने की कोशिश कर रहा है। ईरान का दावा है कि उन्होंने वार्ता के दौरान कई लचीले विकल्प दिए थे, लेकिन अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की मांगें संप्रभुता के खिलाफ थीं। ईरान ने यह भी स्पष्ट किया कि एक ही बैठक में दशकों पुराने विवाद सुलझने की उम्मीद करना व्यावहारिक नहीं है।
शांति वार्ता के विफल होने के मुख्य कारण:
-
परमाणु हथियार: अमेरिका चाहता है कि ईरान परमाणु हथियार न बनाने का लिखित और ठोस आश्वासन दे।
-
हॉर्मुज जलडमरूमध्य: वैश्विक तेल आपूर्ति मार्ग को पूरी तरह खोलने पर भी पेंच फंसा हुआ है।
-
कठोर शर्तें: ईरान ने अमेरिका के ‘रेड लाइन्स’ को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया है।
-
ट्रस्ट डेफिसिट: दोनों देशों के बीच भरोसे की भारी कमी इस 21 घंटे की चर्चा में भी दूर नहीं हो सकी।
इस हाई-प्रोफाइल परमाणु वार्ता (Nuclear Talks) के विफल होने के बाद अब मध्य पूर्व (West Asia) में तनाव फिर से बढ़ने की आशंका है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री और सेना प्रमुख ने दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता की पूरी कोशिश की, लेकिन जेडी वेंस के खाली हाथ लौटने से कूटनीतिक प्रयासों को बड़ा झटका लगा है। ऑस्ट्रेलिया सहित कई देशों ने इस विफलता पर निराशा व्यक्त करते हुए बातचीत जारी रखने की अपील की है।
फिलहाल, जेडी वेंस वाशिंगटन लौट रहे हैं जहाँ वे राष्ट्रपति ट्रंप को इस पूरी चर्चा की विस्तृत जानकारी देंगे। दुनिया की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या अमेरिका ईरान पर प्रतिबंध और कड़े करेगा या भविष्य में बातचीत का कोई और रास्ता निकाला जाएगा।

More Stories
अमेरिका-ईरान युद्ध : होर्मुज विवाद के बीच अमेरिका का बड़ा सैन्य एक्शन, पहली बार B-1 बॉम्बर तैनात
Trump Generic Drug Tariff : 0% से 200% तक टैरिफ का रोडमैप, भारतीय दवा निर्यात पर मंडराया खतरा
US Iran War : हूती विद्रोहियों ने सऊदी के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी का किया ऐलान