नई दिल्ली: पहलगाम आतंकी हमले में कोई हाथ न होने का दावा कर रहे पाकिस्तान की कलई खुलने वाली है. हमले में शामिल आतंकियों के मारे जाने के बाद उनसे बरामद हथियार और गोले-बारूद तो उसका काला चिट्ठा खोलेंगे ही, साथ ही यूएन रिपोर्ट भी उसकी नींद उड़ा देगी. संयुक्त राष्ट्र रिपोर्ट में कहा गया है कि लश्कर ए तैयबा और द रजिस्टेंस फोर्स के बीच रिश्ते हैं. लश्कर की मदद के बिना ये हमला संभव नहीं है. ये दोनों ही घटनाक्रम पाकिस्तान के गले की फांस बनेंगे.
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पहलगाम हमले में मारे गए आतंकियों से जुड़े सारे सबूत और बरामद सामान को NIA अपने कब्जे में लेने जा रही है. जांच एजेंसी ये सभी सबूत और सामान सुरक्षाबलों से अपने कब्जे में लेगी. इसके लिए NIA की टीम सुरक्षाबलों के संपर्क में है. बता दें कि पहलगाम हमले (Pahalgam Terrorist Attack) की जांच NIA कर रही है. हमले के दो आरोपियों बशीर अहमद और परवेज अहमद को गिरफ्तार किया जा चुका है. ये वही आरोपी है, जिन्होंने पहलगाम हमले में शामिल आतंकियों को अपने यहां रुकवाया था.
आतंकियों के पास से क्या-क्या हुआ मिला था?
- 2 AK-47 राइफल
- 1 M4 यूएस मेड कार्बाइन
- AK-47 की खाली मैगजीन (10)
- M4 कार्बाइन के 371 कारतूस
- 3 हैंड ग्रेनेड
- बैग, पाउच, मोबाइल चार्जर, गोप्रो हार्नेस, सोलर चार्जर, स्विस मिलिट्री पॉवर बैंक,मोबाइल फोन
- आधार कार्ड (2 अलग-अलग व्यक्तियों के नाम पर)
- दवाएं, सुई-धागा, नेल कटर, सिगरेट लाइटर
- 3,000 नकद
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NIA हथियारों और कारतूस की बैलेस्टिक रिपोर्ट भी मांगेगी
एनआईए अब सुरक्षाबलों से हथियारों और कारतूस की बैलेस्टिक रिपोर्ट भी मांगेगी. मारे गए आतंकियों से मिले डिजिटल सबूत भी जांच एजेंसी अपने कब्जे में लेगी. बता दें कि डिजिटल सबूत पहलगाम हमले की पूरी साजिश को बेनकाब कर सकते हैं. पहलगाम आतंकी हमले के पीछे कौन था, कैसे हमले की साजिश रची गई, और किसने इन्हें भेजा, इन सभी सवालों के जवाब ऑपरेशन महादेव में मारे गए तीन आतंकियों से मिले इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज़ से मिल सकते हैं.
पाकिस्तान की भूमिका पर हो सकता बड़ा खुलासा
टॉप इंटेलिजेंस सूत्रों का कहना है कि आतंकियों के पास से बरामद मोबाइल फोन और डिजिटल डिवाइस सुरक्षाबलों के पास है. NIA उन्हें फॉरेंसिक जांच के लिए भेजेगी. जांच के बाद पाकिस्तान की भूमिका पर बड़ा खुलासा हो सकता है. उम्मीद है कि इन डिवाइसेज़ से लोकेशन डेटा, कॉल लॉग, चैट रिकॉर्ड, और क्लाउड में सेव कॉन्टेंट जैसे अहम सुराग मिल सकते है. इससे यह पता चल सकता है कि हमला कहां से प्लान हुआ था. आतंकियों को कौन हैंडल कर रहा था और पाकिस्तान से इसका क्या सीधा कनेक्शन है.

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