रायपुर (जसेरि): छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड में कथित तौर पर उच्च पदस्थ अधिकारियों द्वारा नियमों की अनदेखी और मनमाना प्रमोशन दिए जाने का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। सूत्रों के हवाले से यह गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं कि पूर्ववर्ती भूपेश बघेल की सरकार के कार्यकाल के दौरान बोर्ड के कुछ भ्रष्ट अधिकारियों ने राजनीतिक संरक्षण और व्यक्तिगत संबंधों का लाभ उठाते हुए महत्वपूर्ण पदों पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली, जिसके कारण इस महत्वपूर्ण विभाग के कामकाज पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
आरोपों के केंद्र में रहे हाउसिंग बोर्ड के अधिकारियों में कथित तौर पर एमडी पनरिया हर्ष कुमार जोशी और एच.के. वर्मा का नाम शामिल है। इन पर आरोप है कि उन्होंने कथित रूप से तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से नजदीकी और रिश्तेदारी का हवाला देकर तथा “पैसे के लेनदेन” के माध्यम से मनमाने ढंग से प्रमोशन हासिल किए।
सूत्रों का कहना है कि इस तरह की अनियमितताओं का परिणाम यह हुआ है कि एक महत्वपूर्ण विभाग का नियंत्रण उन लोगों के हाथ में आ गया है, जिनके फैसलों पर लगातार पारदर्शिता और भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं। अधिकारियों के मनमाना प्रमोशन और नियमों की अनदेखी के मामले पहले भी सामने आते रहे हैं, जिनमें वरिष्ठ अधिकारियों ने हाई कोर्ट का रुख भी किया था, जहां पदोन्नति में वरिष्ठता सूची को दरकिनार करने जैसे आरोप लगे थे।
स्थानीय मीडिया में चल रहे इन आरोपों से स्पष्ट है कि छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड के कामकाज और उच्च अधिकारियों की नियुक्ति प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं, जिसकी वजह से बोर्ड की कार्यप्रणाली और योजनाओं की सफलता पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है।

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