- बड़ा ऐलान: सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि धर्मांतरण के बाद अनुसूचित जाति (SC) का दर्जा स्वतः समाप्त हो जाएगा।
- धर्म की सीमा: केवल हिंदू, सिख और बौद्ध धर्म को मानने वाले ही SC दर्जे के हकदार बने रहेंगे।
- सख्त आदेश: ईसाई या इस्लाम जैसे धर्म अपनाने वाले व्यक्ति को अनुसूचित जाति का सदस्य नहीं माना जा सकता।
Supreme Court , नई दिल्ली — सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को आरक्षण और संवैधानिक अधिकारों को लेकर एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया। जस्टिस की बेंच ने स्पष्ट कर दिया कि अगर कोई व्यक्ति अपना धर्म बदलकर ईसाई या इस्लाम अपनाता है, तो वह अनुसूचित जाति (SC) को मिलने वाले विशेष कानूनी और आरक्षण लाभों का दावा नहीं कर सकता। अदालत ने साफ कहा कि SC दर्जा केवल उन धर्मों तक सीमित है जिनका उल्लेख संवैधानिक आदेशों में स्पष्ट रूप से किया गया है।
संवैधानिक प्रावधानों पर मुहर: किसके पास रहेगा दर्जा?
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में पुराने नियमों को दोहराया और संविधान के मूल ढांचे की रक्षा की। अदालत ने कहा कि आरक्षण का उद्देश्य उन सामाजिक कुरूतियों से लड़ना था जो विशिष्ट धर्मों के भीतर मौजूद थीं।
- मान्य धर्म: हिंदू, सिख और बौद्ध।
- अमान्य (SC दर्जे के लिए): ईसाई, इस्लाम और अन्य धर्म।
- मुख्य आधार: संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश, 1950।
अदालत ने यह स्पष्ट किया कि धर्मांतरण केवल एक निजी विश्वास का बदलाव नहीं है, बल्कि यह उस सामाजिक श्रेणी से बाहर निकलने जैसा है जिसके आधार पर आरक्षण दिया जाता है। यदि कोई व्यक्ति इन तीन धर्मों के बाहर जाता है, तो उसे मिलने वाला आरक्षण का कवच तुरंत गिर जाएगा।
“संविधान के तहत अनुसूचित जाति का दर्जा उन ऐतिहासिक और सामाजिक विसंगतियों से जुड़ा है जो हिंदू समाज और उसके विस्तारित अंगों (सिख-बौद्ध) का हिस्सा थे। यदि कोई व्यक्ति स्वेच्छा से ऐसा धर्म चुनता है जो जाति व्यवस्था को मान्यता नहीं देता, तो वह SC दर्जे के लाभ जारी रखने की मांग नहीं कर सकता।”
— सुप्रीम कोर्ट बेंच

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