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April 11, 2026

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CG Board Exam : उत्तर पुस्तिकाओं में कहीं हनुमान चालीसा तो कहीं शादी की गुहार

रायपुर, छत्तीसगढ़: छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मण्डल (CGBSE) की बोर्ड परीक्षाओं के मूल्यांकन के दौरान बोर्ड कॉपियों में अजीबोगरीब अपीलें देखने को मिल रही हैं। रायपुर समेत प्रदेश के विभिन्न मूल्यांकन केंद्रों पर जब शिक्षकों ने उत्तर पुस्तिकाएं खोलीं, तो वहां सवालों के जवाब के बजाय छात्रों की निजी समस्याएं और धार्मिक आस्था लिखी मिली। शनिवार को मूल्यांकन कार्य के दौरान यह बात सामने आई कि कई छात्रों ने पास होने के लिए हनुमान चालीसा लिखी है, तो किसी ने अपनी शादी तय होने का हवाला देते हुए पास करने की भावुक गुहार लगाई है। परीक्षकों के लिए यह स्थिति न केवल चौंकाने वाली है, बल्कि उनके सामने मूल्यांकन को लेकर नैतिक दुविधा भी खड़ी कर रही है।

धार्मिक आस्था और व्यक्तिगत संकट का सहारा

मूल्यांकन केंद्रों से मिली जानकारी के अनुसार, उत्तर पुस्तिकाओं में छात्रों की रचनात्मकता उत्तर लिखने के बजाय परीक्षकों को मनाने में अधिक दिख रही है। कुछ कॉपियों में पूरे पृष्ठ पर हनुमान चालीसा लिखी गई है, संभवतः इस उम्मीद में कि इससे परीक्षक प्रभावित होकर नंबर दे देंगे। वहीं, कुछ छात्राओं ने लिखा है कि यदि वे फेल हो गईं, तो उनके घरवाले उनकी मर्जी के बिना शादी कर देंगे। बोर्ड कॉपियों में अजीबोगरीब अपीलें लिखने का यह चलन सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बना हुआ है।

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भावुक कर देने वाले कुछ प्रमुख संदेश

शिक्षकों के अनुसार, कॉपियों में इस तरह के संदेश अक्सर उन छात्रों द्वारा लिखे जाते हैं जिनकी तैयारी कमजोर होती है:

  • पारिवारिक स्थिति: “मेरे पिता बीमार हैं, अगर मैं पास नहीं हुआ तो पढ़ाई छूट जाएगी।”

  • शादी का डर: “सर, प्लीज पास कर देना, वरना घरवाले मेरी शादी करा देंगे।”

  • धार्मिक मंत्र: प्रश्नों के उत्तर की जगह जय श्री राम, ओम या हनुमान चालीसा का उल्लेख।

  • आर्थिक मजबूरी: घर की गरीबी का वास्ता देकर ग्रेस मार्क्स की मांग।

नियमों के आगे बेबस परीक्षक

शिक्षकों का कहना है कि हर साल इस तरह के मामले सामने आते हैं, लेकिन इस बार इनकी संख्या और विविधता बढ़ गई है। बोर्ड के स्पष्ट निर्देश हैं कि अंक केवल सही उत्तरों और स्टेप-मार्किंग के आधार पर ही दिए जाएं। बोर्ड कॉपियों में अजीबोगरीब अपीलें लिखने से छात्रों को कोई अतिरिक्त लाभ नहीं मिलता। परीक्षकों के अनुसार, वे चाहकर भी भावनात्मक आधार पर नंबर नहीं दे सकते क्योंकि पूरी प्रक्रिया की मॉनिटरिंग की जाती है।

विशेषज्ञों की राय और छात्रों को सलाह

शिक्षाविदों का मानना है कि यह प्रवृत्ति छात्रों में परीक्षा के प्रति बढ़ते दबाव और कम तैयारी को दर्शाती है। मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, छात्र अंतिम विकल्प के रूप में इस तरह के शॉर्टकट अपनाते हैं। हालांकि, बोर्ड अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि ऐसी कॉपियों को ‘अवांछित सामग्री’ की श्रेणी में रखा जाता है और सख्त अनुशासन का पालन किया जाता है।

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