वेब न्यूज़ पोर्टल संघर्ष के स्वर

संघर्ष ही सफलता की पहली सीढ़ी है।

Rudrabhishek : रुद्राभिषेक में श्रृंगी से ही क्यों चढ़ाया जाता है जल? जानिए धार्मिक मान्यता और इसका महत्व

Rudrabhishek 2026: हिंदू धर्म में भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व माना गया है। खासकर सावन का महीना भगवान भोलेनाथ की आराधना के लिए बेहद शुभ माना जाता है। इस दौरान शिव भक्त मंदिरों और घरों में रुद्राभिषेक कर भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं। रुद्राभिषेक के दौरान जल, दूध, दही, घी, शहद समेत कई पवित्र पदार्थों से शिवलिंग का अभिषेक किया जाता है।

रुद्राभिषेक की विधि में एक विशेष पात्र ‘श्रृंगी’ का इस्तेमाल भी किया जाता है। मान्यता है कि श्रृंगी से शिवलिंग पर जल चढ़ाने से अभिषेक की विधि विशेष रूप से फलदायी होती है। आखिर श्रृंगी क्या है और रुद्राभिषेक में इससे ही जल चढ़ाने की परंपरा क्यों है? आइए जानते हैं।

क्या होता है श्रृंगी पात्र?

श्रृंगी पूजा-पाठ में इस्तेमाल किया जाने वाला एक विशेष प्रकार का पात्र है। इसका आकार सामान्य तौर पर किसी पशु के सींग जैसा होता है। इसे तांबा, पीतल और चांदी जैसी धातुओं से बनाया जाता है। रुद्राभिषेक के दौरान इसी पात्र के जरिए शिवलिंग पर जल या अन्य अभिषेक सामग्री अर्पित की जाती है।

CG Crime News : बाघ की खाल की तस्करी का भंडाफोड़, वन विभाग की बड़ी कार्रवाई में तीन आरोपी गिरफ्तार

श्रृंगी से निकलने वाली जलधारा अपेक्षाकृत नियंत्रित और लगातार रहती है। इसी वजह से रुद्राभिषेक में इसका इस्तेमाल विशेष महत्व रखता है।

शिवलिंग पर श्रृंगी से जल चढ़ाना क्यों माना जाता है खास?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव को जलधारा अत्यंत प्रिय है। श्रृंगी से निकलने वाली लगातार जलधारा सीधे शिवलिंग तक पहुंचती है और भगवान शिव के मस्तक का अभिषेक करती है। इसे भगवान शिव के प्रति भक्त की श्रद्धा और समर्पण का प्रतीक माना जाता है।

मान्यता है कि रुद्राभिषेक के दौरान लगातार जलधारा बनाए रखने से पूजा की विधि व्यवस्थित तरीके से पूरी होती है। इसी कारण श्रृंगी को रुद्राभिषेक की महत्वपूर्ण सामग्री माना जाता है।

नंदी से जुड़ी है श्रृंगी की पौराणिक मान्यता

श्रृंगी को लेकर एक पौराणिक मान्यता भगवान शिव के परम भक्त नंदी से भी जुड़ी हुई बताई जाती है। मान्यता के अनुसार, नंदी ने भगवान शिव को श्रृंगी भेंट की थी और भगवान शिव ने इसे अपने अभिषेक के लिए स्वीकार किया। तभी से शिवलिंग के अभिषेक में श्रृंगी के इस्तेमाल की परंपरा चली आ रही है।

हालांकि, ऐसी पौराणिक मान्यताओं का उल्लेख अलग-अलग परंपराओं में अलग रूप में मिलता है। इसलिए इसे धार्मिक मान्यता के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।

क्या बिना श्रृंगी के भी कर सकते हैं रुद्राभिषेक?

अगर किसी कारण से श्रृंगी उपलब्ध न हो तो रुद्राभिषेक करना बंद करने की जरूरत नहीं है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्रद्धा और विधि के साथ अन्य पात्र से भी भगवान शिव का जलाभिषेक किया जा सकता है। इसके लिए तांबे के लोटे का इस्तेमाल किया जा सकता है।

जल चढ़ाते समय कोशिश करें कि शिवलिंग पर जल की धारा सहज रूप से अर्पित हो। पूजा में सबसे महत्वपूर्ण श्रद्धा, भक्ति और शुद्ध भाव माने जाते हैं।

सावन में क्यों बढ़ जाता है रुद्राभिषेक का महत्व?

सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। इस दौरान शिव भक्त सोमवार व्रत, जलाभिषेक और रुद्राभिषेक जैसे धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। मान्यता है कि सावन में भगवान शिव की पूजा करने से भक्तों को विशेष आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होता है।

About The Author

YouTube Shorts Autoplay