मुआवजा नीति और पात्रता: किसे मिलेगा पैसा?
RBI के हालिया दिशा-निर्देशों के अनुसार, यदि कोई ग्राहक किसी ऐसे डिजिटल फ्रॉड का शिकार होता है जिसमें उसकी अपनी गलती (जैसे OTP साझा करना) नहीं है, तो बैंक को एक निश्चित समय सीमा के भीतर नुकसान की भरपाई करनी होगी। ₹25,000 तक की राशि का रिफंड सीधे पीड़ित के खाते में जमा किया जाएगा, बशर्ते बैंक को सूचना फ्रॉड होने के 72 घंटों के भीतर दी गई हो। यदि देरी ग्राहक की ओर से नहीं है, तो पूरी जिम्मेदारी बैंक की मानी जाएगी।
अधिकारियों का रुख: सुरक्षा ही सबसे बड़ा बचाव
साइबर सेल और बैंकिंग लोकपाल ने इस फैसले का स्वागत किया है। अधिकारियों का मानना है कि इससे न केवल डिजिटल भुगतान में लोगों का भरोसा बढ़ेगा, बल्कि बैंक भी अपने सुरक्षा सिस्टम को मजबूत करने के लिए बाध्य होंगे।
“डिजिटल इकोसिस्टम में ग्राहकों का भरोसा बनाए रखना हमारी प्राथमिकता है। नए नियमों का उद्देश्य बैंकिंग फ्रॉड की जांच प्रक्रिया को तेज करना और यह सुनिश्चित करना है कि निर्दोष ग्राहकों को आर्थिक नुकसान न झेलना पड़े।” — डॉ. आर.के. वर्मा, वरिष्ठ बैंकिंग लोकपाल
आम जनता पर असर: अब आगे क्या?
इस फैसले का सबसे बड़ा असर मध्यमवर्गीय परिवारों और उन वरिष्ठ नागरिकों पर पड़ेगा जो अक्सर तकनीक की जटिलताओं के कारण साइबर अपराधियों के आसान शिकार बन जाते हैं। अब ठगी होने पर पीड़ित को पुलिस FIR के साथ अपने संबंधित बैंक की ‘होम ब्रांच’ में लिखित शिकायत दर्ज करानी होगी। बैंक को शिकायत मिलने के 10 कार्य दिवसों के भीतर मामले की प्राथमिक जांच पूरी कर मुआवजे की प्रक्रिया शुरू करनी होगी

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