नई दिल्ली। रेलवे की कार्यप्रणाली को लेकर संसद की एक स्थायी समिति ने मंगलवार को अपनी रिपोर्ट पेश की, जिसमें यात्रियों के हितों को ध्यान में रखते हुए क्रांतिकारी बदलावों की सिफारिश की गई है। समिति ने स्पष्ट रूप से कहा है कि RAC (Reservation Against Cancellation) श्रेणी में यात्रियों से पूरा किराया वसूलना अनुचित है और रेलवे को इसमें आंशिक किराया वापसी (Partial Refund) की व्यवस्था शुरू करनी चाहिए।
RAC यात्रियों के साथ न्याय की मांग
संसदीय समिति ने रेल मंत्रालय को सुझाव दिया है कि जब एक ही बर्थ को दो यात्रियों के बीच साझा किया जाता है, तो उनसे पूरा किराया लेना नैतिक रूप से सही नहीं है।
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तर्क: RAC यात्री को पूरी बर्थ की सुविधा नहीं मिलती, फिर भी उससे कन्फर्म टिकट के बराबर पैसे लिए जाते हैं।
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सिफारिश: मंत्रालय को ऐसे नियम बनाने चाहिए जिससे RAC बर्थ आवंटित होने पर यात्री का कुछ हिस्सा रिफंड कर दिया जाए।
सुपरफास्ट ट्रेनों के बेंचमार्क पर सवाल
समिति ने रेलवे द्वारा ट्रेनों को ‘सुपरफास्ट’ घोषित करने के पुराने पैमानों पर भी नाराजगी जताई है। वर्तमान में रेलवे 55 किमी/घंटा की औसत गति वाली ट्रेनों को सुपरफास्ट मानकर यात्रियों से ‘सुपरफास्ट सरचार्ज’ वसूलता है।
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बेंचमार्क बदलें: समिति ने कहा कि आज के दौर में 55 किमी/घंटा की रफ्तार को किसी भी मानक से सुपरफास्ट नहीं कहा जा सकता।
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सुझाव: रेलवे को सुपरफास्ट कहलाने के लिए अपनी गति सीमा (Benchmark) बढ़ानी चाहिए, ताकि यात्रियों को दिए जा रहे अतिरिक्त पैसे का सही मूल्य मिल सके।
वरिष्ठ नागरिकों की रियायत पर भी चर्चा
संसदीय समिति ने एक बार फिर वरिष्ठ नागरिकों को ट्रेन किराए में मिलने वाली छूट (Concession) को बहाल करने का सुझाव दिया है। समिति का मानना है कि कोरोना काल से बंद हुई इस सुविधा को कम से कम स्लीपर और थर्ड एसी श्रेणी के बुजुर्गों के लिए दोबारा शुरू किया जाना चाहिए।
यात्री सुविधाओं पर अन्य सुझाव:
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वंदे भारत का विस्तार: समिति ने वंदे भारत ट्रेनों की संख्या बढ़ाने और लंबी दूरी की स्लीपर वंदे भारत को जल्द पटरी पर उतारने पर जोर दिया।
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स्वच्छता और सुरक्षा: स्टेशनों और कोचों में साफ-सफाई के साथ-साथ ट्रेनों में सीसीटीवी कैमरों के जाल को और मजबूत करने की बात कही गई।

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