कोर्टरूम में तेज टकराव, दलीलों की बौछार
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने जोर देकर कहा कि गिरफ्तारी की कार्रवाई असामान्य थी। उन्होंने दावा किया कि “करीब 60 पुलिसकर्मी घर पहुंचे” — यह दलील अदालत में बहस का केंद्र बन गई। सरकार की ओर से पेश वकीलों ने इसका विरोध किया। उन्होंने कहा कि पुलिस ने कानून के दायरे में रहकर कार्रवाई की। माहौल गर्म था। सवाल सीधे थे। जवाब भी उतने ही तेज। कोर्ट ने बीच-बीच में हस्तक्षेप किया और दोनों पक्षों को तथ्यों पर टिके रहने को कहा।
कानूनी पेच: गिरफ्तारी बनाम स्वतंत्रता
मामले का असली सवाल यही है—क्या गिरफ्तारी जरूरी थी या नोटिस से काम चल सकता था?
- बचाव पक्ष: गिरफ्तारी अनुचित और जल्दबाजी
- सरकार: FIR गंभीर, कार्रवाई जरूरी
- कोर्ट: दोनों पक्षों के तर्क रिकॉर्ड पर
यहीं पर केस दिलचस्प हो जाता है। कानून और अधिकार आमने-सामने खड़े हैं।

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