नई दिल्ली/कोयंबटूर/अहमदाबाद। देशभर में NEET-UG को लेकर चल रहे विवाद और तनाव के बीच छात्रों की आत्महत्या के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। तमिलनाडु और गुजरात से आई दो ताजा घटनाओं ने एक बार फिर शिक्षा प्रणाली और परीक्षा दबाव पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कोयंबटूर में छात्रा ने जहर खाकर दी जान
तमिलनाडु के Coimbatore में 19 वर्षीय छात्रा अनुकीर्तना ने बुधवार सुबह जहर खाकर आत्महत्या कर ली। वह NEET की तैयारी कर रही थी और मेडिकल कॉलेज में एडमिशन का इंतजार कर रही थी।
मौत से पहले छात्रा ने अपने रिश्तेदारों को व्हाट्सएप मैसेज भेजकर परीक्षा रद्द होने और दोबारा परीक्षा देने के डर का जिक्र किया। उसने लिखा कि उसके पिता ने उसकी पढ़ाई पर काफी पैसा खर्च किया है और वह उनका सामना नहीं कर पाएगी।
परिजनों के पहुंचने तक वह बेहोश मिली और अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
अहमदाबाद में छात्र ने लगाई छलांग
वहीं Ahmedabad के न्यू रानीप इलाके में 17 वर्षीय छात्र ने एक इमारत की छठी मंजिल से कूदकर जान दे दी। पुलिस के अनुसार, वह भी NEET परीक्षा की तैयारी कर रहा था। हालांकि, उसके आत्महत्या के पीछे का कारण अभी स्पष्ट नहीं हो सका है।
2 दिन में 4 छात्रों की मौत
पिछले दो दिनों में NEET से जुड़े छात्रों की आत्महत्या के यह चौथे मामले हैं। इससे पहले देहरादून और लखनऊ में भी छात्रों ने सुसाइड किया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, परीक्षा रद्द होने के बाद अब तक करीब 12 छात्र अपनी जान गंवा चुके हैं।
परिवार ने उठाई कार्रवाई की मांग
अनुकीर्तना के परिवार ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan के इस्तीफे की मांग की है। साथ ही स्थानीय संगठनों ने NEET परीक्षा प्रणाली पर सवाल उठाते हुए प्रदर्शन भी किया।
पेपर लीक के बाद रद्द हुई परीक्षा
NEET-UG परीक्षा 3 मई 2026 को आयोजित हुई थी, जिसमें करीब 23 लाख छात्र शामिल हुए थे। कई राज्यों से पेपर लीक की शिकायतें मिलने के बाद National Testing Agency ने 12 मई को परीक्षा रद्द कर दी और 21 जून को दोबारा परीक्षा कराने का निर्णय लिया।
क्या है NEET परीक्षा?
NEET देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा है, जिसके माध्यम से MBBS, BDS, AYUSH और नर्सिंग जैसे कोर्सेज में एडमिशन मिलता है। AIIMS और JIPMER जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में भी इसी के जरिए प्रवेश दिया जाता है।
निष्कर्ष: बढ़ता दबाव बना चिंता का विषय
लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों ने परीक्षा प्रणाली और छात्रों पर बढ़ते मानसिक दबाव को उजागर कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल परीक्षा नहीं, बल्कि छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी ध्यान देना अब बेहद जरूरी हो गया है।

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