देश में एक महत्वपूर्ण संवैधानिक बदलाव की तैयारी चल रही है, जिसके तहत 1 मार्च 2027 को जनगणना पूरी होने के बाद लोकसभा और विधानसभाओं की सीटों का परिसीमन किया जाएगा। यह परिसीमन केवल सीटों की संख्या में वृद्धि ही नहीं करेगा, बल्कि एक ऐतिहासिक कदम के रूप में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटों का आरक्षण भी लागू करेगा। इस संबंध में महिला आरक्षण विधेयक 2023 को संसद पहले ही पारित कर चुकी है, जिससे इस बड़े बदलाव का मार्ग प्रशस्त हो गया है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, मई 2027 में जनगणना के आंकड़े उपलब्ध होने के साथ ही लोकसभा और विधानसभाओं के परिसीमन की प्रक्रिया तेजी से शुरू हो जाएगी। इस नए परिसीमन के बाद लोकसभा की सीटें 800 से अधिक हो सकती हैं, जो वर्तमान 543 सीटों से काफी अधिक होंगी। यह बदलाव अगले 2029 के लोकसभा चुनाव की तस्वीर को पूरी तरह बदल देगा।
गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आश्वस्त किया है कि नए परिसीमन में दक्षिणी राज्यों की चिंताओं का भी ध्यान रखा जाएगा। दक्षिणी राज्यों में जनसंख्या वृद्धि पर प्रभावी नियंत्रण के कारण लोकसभा में उनकी हिस्सेदारी कम होने की आशंका रही है। शाह ने संसद में यह आश्वासन दिया है कि दक्षिणी राज्यों की लोक सीटों को भारत के राज्यों के समग्र अनुपात में बढ़ने के आधार पर देखा जाएगा, ताकि उनकी हिस्सेदारी प्रभावित न हो।
2002 में हुए 84वें संविधान संशोधन में यह तय किया गया था कि वर्ष 2026 तक लोकसभा और विधानसभा की सीटों को जनगणना के आंकड़ों के आधार पर बढ़ाया जाएगा। अब चूंकि जनगणना की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही परिसीमन का मार्ग प्रशस्त होगा। सीटों की संख्या कितनी बढ़ेगी, यह जनगणना के आंकड़ों के आधार पर ही तय होगा। पिछला परिसीमन 2006 में संपन्न हुआ था, जो 2002 में संसद में पारित पर परमनियम के अनुसार किया गया था और 2001 की जनगणना के आंकड़ों पर आधारित था। इससे पहले, 1951 से 1971 तक जनगणना के बाद परिसीमन आयोग का गठन होता रहा था और लोकसभा तथा विधानसभा की सीटें बढ़ती रही थीं। यह आगामी परिसीमन देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा, जिससे प्रतिनिधित्व में संतुलन और महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित होगी।



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