फर्नेस फटने से बरपा कहर, सुरक्षा मानकों पर उठे सवाल
हादसा उस वक्त हुआ जब फर्नेस में लोहे को पिघलाने की प्रक्रिया चल रही थी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अचानक एक जोरदार धमाके के साथ पिघला हुआ तरल लोहा कर्मचारियों पर आ गिरा। इस हादसे ने प्लांट में सुरक्षा इंतजामों की पोल खोल दी है। घायल कर्मचारियों के परिजनों और साथियों का आरोप है कि उन्हें बिना सुरक्षा जैकेट और मानक उपकरणों के फर्नेस जैसे खतरनाक सेक्शन में काम कराया जा रहा था। यदि कर्मचारी सुरक्षा गियर में होते, तो झुलसने की तीव्रता कम हो सकती थी।
प्रशासनिक जांच और पुलिस की कार्रवाई
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और औद्योगिक सुरक्षा विभाग की टीम जांच के लिए सक्रिय हो गई है। पुलिस ने अस्पताल जाकर घायलों की स्थिति का जायजा लिया। प्राथमिक जांच में यह देखा जा रहा है कि क्या हादसे के समय सेफ्टी प्रोटोकॉल का पालन किया गया था या नहीं। बिल्हा पुलिस ने मामले को संज्ञान में लेते हुए जांच शुरू कर दी है।
“प्लांट में सुरक्षा के नाम पर खिलवाड़ हो रहा है। हमारे साथियों के पास न तो उचित जैकेट थी और न ही हेलमेट। हम प्रबंधन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हैं। दोषियों को सजा मिलनी चाहिए।”
— एक चश्मदीद कर्मचारी, नोवा स्पंज आयरन प्लांट
इस हादसे के बाद बिल्हा औद्योगिक क्षेत्र के अन्य प्लांटों में काम करने वाले मजदूरों में आक्रोश है। मजदूर संगठनों ने घटना के विरोध में प्रदर्शन की चेतावनी दी है। आने वाले दिनों में औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग (Directorate of Industrial Health and Safety) प्लांट का ऑडिट कर सकता है। यदि लापरवाही सिद्ध होती है, तो प्लांट प्रबंधन पर भारी जुर्माना और कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल, बिलासपुर जिला प्रशासन घायलों के समुचित इलाज पर नजर रखे हुए है।

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