Naxalite Leaflet , बीजापुर। दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी के नाम से जारी एक नया नक्सली पर्चा सोशल मीडिया और ग्रामीण क्षेत्रों में तेजी से वायरल हो रहा है। इस पर्चे में नक्सलियों ने दावा किया है कि उनका शीर्ष लीडर देवजी आंध्र प्रदेश पुलिस की हिरासत में है और उसे मुठभेड़ में मारे जाने की कहानी झूठी बताई जा रही है। पर्चे में नक्सलियों ने देवजी समेत 50 साथियों को कोर्ट में पेश करने की मांग उठाई है।
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नक्सल प्रवक्ता ‘विकल्प’ के नाम से जारी हुआ पर्चा
पर्चा दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी के प्रवक्ता विकल्प के नाम से जारी किया गया है। इसमें लिखा गया है कि उन्हें विश्वसनीय स्रोतों से पता चला है कि देवजी को अन्य साथियों के साथ आंध्र प्रदेश पुलिस ने गुपचुप तरीके से गिरफ्तार किया है।
नक्सल दावा कर रहे हैं कि पुलिस ने देवजी को पहले “मुठभेड़ में मारा गया” बताया था, लेकिन असल में यह मुठभेड़ फर्जी थी और पूरी कहानी पुलिस द्वारा गढ़ी गई है।
पुलिस पर गंभीर आरोप
पर्चे में पुलिस तंत्र पर आरोप लगाया गया है कि गिरफ्तार नक्सलियों को कानूनी प्रक्रिया से दूर रखकर अवैध हिरासत में रखा जा रहा है। साथ ही मांग की गई है कि उन्हें जल्द से जल्द कोर्ट में पेश किया जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
IG सुंदरराज पी. बोले—नक्सलियों के झूठ पर न जाएं, मुख्यधारा में लौटें
इस बीच बस्तर के IG सुंदरराज पी. ने नक्सली पर्चे को लेकर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि माओवादियों का काम ही भ्रम फैलाना और ग्रामीणों को गुमराह करना है।
उन्होंने दोहराया कि पुलिस का मकसद सिर्फ सुरक्षा और शांति स्थापित करना है।
IG ने कहा—
“माओवादियों के पास अब एक ही रास्ता बचा है—हिंसा छोड़कर आत्मसमर्पण करें और समाज की मुख्यधारा में शामिल हों।”
नक्सल गतिविधियों में फिर तेजी की आशंका
जंगल क्षेत्रों में पर्चे के प्रसार को सुरक्षा एजेंसियां गंभीरता से देख रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसा पर्चा जारी होना संकेत देता है कि नक्सली संगठन आंतरिक दबाव में है और अपनी पकड़ मजबूत दिखाने की कोशिश कर रहा है। साथ ही पुलिस-नक्सली टकराव की आशंका भी बढ़ सकती है।
ग्रामीणों में चर्चा तेज
पर्चा वायरल होने के बाद बीजापुर, सुकमा, दंतेवाड़ा और नारायणपुर के कई गांवों में चर्चा तेज हो गई है। ग्रामीण दोनों पक्षों के दावों के बीच असमंजस में हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस और नक्सल दोनों ही अपनी-अपनी जानकारी साझा करते हैं, लेकिन सच क्या है, यह सामने नहीं आ पाता।
पुलिस की निगरानी बढ़ी
सूत्रों के मुताबिक सुरक्षा बलों ने इस घटनाक्रम के बाद जंगल क्षेत्रों में अपनी गश्त और खुफिया गतिविधियाँ तेज कर दी हैं। आने वाले दिनों में इस क्षेत्र में पुलिस और सीआरपीएफ की संयुक्त कार्रवाई बढ़ने की संभावना है।

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