संगठन में मची भगदड़: देवजी के सरेंडर के मायने
पुलिस मुख्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, देवजी पिछले कई दशकों से अबूझमाड़ और बस्तर के जंगलों में सक्रिय था। बसवा राजू के मारे जाने के बाद उसे संगठन का महासचिव बनाया गया था, जो नक्सली पदानुक्रम में सर्वोच्च पद होता है। सुरक्षा बलों के बढ़ते दबाव और ‘लोन वर्राटू’ (घर वापस आइये) जैसे अभियानों के प्रभाव के चलते शीर्ष नेतृत्व में यह बड़ी दरार आई है।
देवजी के सरेंडर से पुलिस को संगठन के अंदरूनी नेटवर्क, फंड मैनेजमेंट और आगामी रणनीतियों की महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की उम्मीद है। संग्राम, जो एक अन्य खूंखार कमांडर है, उसका आत्मसमर्पण भी बस्तर में सक्रिय नक्सलियों के मनोबल को ध्वस्त करने वाला साबित होगा।
“यह बस्तर में नक्सलवाद के अंत की शुरुआत है। देवजी जैसे शीर्ष कमांडर का सरेंडर करना यह दर्शाता है कि अब निचले कैडर का अपने नेतृत्व से विश्वास उठ चुका है। हम अन्य नक्सलियों से भी अपील करते हैं कि वे हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में शामिल हों।”

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