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February 20, 2026

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Kharmas 2026 : 15 मार्च से फिर थमेंगे मांगलिक कार्य, सूर्य के मीन राशि में प्रवेश से लगेगा साल का दूसरा ‘मलमास’

नई दिल्ली। हिंदू पंचांग के अनुसार, साल 2026 का दूसरा खरमास मार्च के महीने में शुरू होने जा रहा है। ज्योतिष गणना के अनुसार, जब सूर्य देव बृहस्पति की राशि (मीन या धनु) में प्रवेश करते हैं, तो उस काल को खरमास या मलमास कहा जाता है। मार्च 2026 में सूर्य के राशि परिवर्तन के साथ ही विवाह, गृह प्रवेश और मुंडन जैसे सभी शुभ कार्यों पर एक महीने के लिए विराम लग जाएगा।

कब से कब तक रहेगा खरमास?

वैदिक पंचांग के मुताबिक, सूर्य देव 15 मार्च 2026, रविवार को दोपहर करीब 1:08 बजे मीन राशि में गोचर करेंगे। इसी के साथ मीन खरमास की शुरुआत हो जाएगी।

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  • प्रारंभ तिथि: 15 मार्च 2026

  • समापन तिथि: 14 अप्रैल 2026 (मेष संक्रांति के साथ)

भूलकर भी न करें ये गलतियां

खरमास की अवधि को ज्योतिष शास्त्र में शुभ नहीं माना जाता है। इस दौरान निम्नलिखित कार्यों को करने से बचना चाहिए:

  1. शादी-ब्याह और सगाई: इस समय गुरु का प्रभाव कम हो जाता है, जिससे वैवाहिक जीवन में बाधाएं आ सकती हैं।

  2. नया व्यापार: किसी भी नए कारोबार या दुकान का शुभारंभ इस अवधि में नहीं करना चाहिए।

  3. गृह प्रवेश और निर्माण: नए घर में प्रवेश करना या मकान की नींव रखना वर्जित माना गया है।

  4. कीमती वस्तुओं की खरीदारी: जमीन, मकान या नए वाहन की खरीदारी के लिए यह समय उपयुक्त नहीं है।

क्यों अशुभ माना जाता है खरमास?

पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस दौरान सूर्य के रथ के घोड़े थक जाते हैं और सूर्य देव को ‘खर’ (गधे) के रथ पर सवार होकर अपनी यात्रा जारी रखनी पड़ती है। गधों की गति धीमी होने के कारण सूर्य का तेज कम हो जाता है। ज्योतिषीय दृष्टि से, जब सूर्य अपने गुरु (बृहस्पति) की राशि में होते हैं, तो वह गुरु की शुभता को कम कर देते हैं, जिससे मांगलिक कार्यों का फल नहीं मिल पाता।

खरमास में क्या करना है फलदायी?

यद्यपि मांगलिक कार्य वर्जित हैं, लेकिन आध्यात्मिक दृष्टिकोण से यह समय बहुत महत्वपूर्ण है:

  • दान-पुण्य: गरीबों को अनाज, गुड़ और तिल का दान करना अत्यंत शुभ होता है।

  • आदित्य हृदय स्तोत्र: सूर्य देव को अर्घ्य देना और स्तोत्र का पाठ करना स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है।

  • विष्णु उपासना: इस पूरे माह भगवान विष्णु और श्री कृष्ण की पूजा-अर्चना करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।

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