रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में पुलिस की बर्बरता का एक रोंगटे खड़े कर देने वाला मामला सामने आया है। टिकरापारा थाना क्षेत्र के कमल विहार पुलिस सहायता केंद्र में तैनात दो आरक्षकों ने मोबाइल चोरी के संदेह में एक नाबालिग लड़के की इतनी बेरहमी से पिटाई की कि उसके शरीर पर गहरे जख्म बन गए। मामले की गंभीरता को देखते हुए विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों दोषी आरक्षकों को निलंबित कर दिया है।
सहायता केंद्र बना ‘यातना गृह’
प्राप्त जानकारी के अनुसार, कमल विहार पुलिस सहायता केंद्र में पदस्थ दो आरक्षकों ने एक नाबालिग को मोबाइल चोरी के शक में पकड़ा था। आरोप है कि पूछताछ के नाम पर कानून को ताक पर रखकर दोनों आरक्षकों ने नाबालिग को बेल्ट और डंडों से बुरी तरह पीटा। घटना के बाद जब नाबालिग घर पहुँचा, तो उसके शरीर पर चोट के निशान देखकर परिजन दंग रह गए।
परिजनों का आक्रोश और पुलिस की कार्रवाई
नाबालिग के साथ हुई इस अमानवीय घटना की खबर फैलते ही स्थानीय लोगों और परिजनों में भारी आक्रोश व्याप्त हो गया। परिजनों ने पुलिस के आला अधिकारियों से इसकी शिकायत की। मेडिकल जांच में नाबालिग के शरीर पर गंभीर चोटों की पुष्टि होने के बाद, विभाग ने प्राथमिक जांच में आरक्षकों को दोषी पाया।
“किसी भी सूरत में पुलिस की बर्बरता स्वीकार्य नहीं है। कानून हाथ में लेने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है।” — वरिष्ठ पुलिस अधिकारी
मुख्य बिंदु: घटना का विवरण
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स्थान: कमल विहार पुलिस सहायता केंद्र (थाना टिकरापारा), रायपुर।
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पीड़ित: एक स्थानीय नाबालिग बालक।
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आरोप: मोबाइल चोरी के संदेह में अवैध रूप से मारपीट।
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कार्रवाई: दो आरक्षक तत्काल प्रभाव से निलंबित।
पुलिस की कार्यशैली पर उठे सवाल
राजधानी में हुई इस घटना ने एक बार फिर पुलिस की ‘फ्रेंडली पुलिसिंग’ के दावों की पोल खोल दी है। नाबालिगों के साथ व्यवहार के लिए बने जुवेनाइल जस्टिस एक्ट की सरेआम धज्जियां उड़ाने वाले इन आरक्षकों पर अब विभागीय जांच की गाज भी गिर सकती है।

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