हाथियों की फौज से सहमे गांव: धरमजयगढ़ बना हॉटस्पॉट
धरमजयगढ़ वन मंडल हमेशा से हाथियों के कॉरिडोर का हिस्सा रहा है, लेकिन 123 हाथियों का एक साथ मौजूद होना असामान्य है। यह संख्या पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 20% अधिक है, जो मानव-हाथी द्वंद्व (Human-Elephant Conflict 2026) के खतरे को बढ़ा रही है। छाल रेंज में सक्रिय 35 हाथियों का दल सबसे बड़ा है, जो फसलों और घरों को नुकसान पहुंचाने की ताक में है।
वन विभाग की टीमें अलर्ट पर हैं और 24 घंटे निगरानी रख रही हैं। ग्रामीणों को शाम के बाद घरों से बाहर न निकलने और हाथियों के करीब न जाने की सख्त हिदायत दी गई है। 2026 में रायगढ़ जिले में अब तक हाथी के हमले से 3 लोगों की मौत और दर्जनों घरों के टूटने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जो स्थिति की गंभीरता को बयां करती हैं।
“हाथियों की संख्या में यह अप्रत्याशित वृद्धि हमारे लिए बड़ी चुनौती है। 123 हाथी एक बड़ा आंकड़ा है। हमारी प्राथमिकता जान-माल की सुरक्षा है। हम तकनीक का इस्तेमाल कर दल को रिहायशी इलाकों से दूर धकेलने की कोशिश कर रहे हैं।”
— धरमजयगढ़ वन मंडल के एक वरिष्ठ अधिकारी
2026 में रायगढ़ जिले में बढ़ते मानव-हाथी द्वंद्व को देखते हुए वन विभाग दीर्घकालिक रणनीतियों पर काम कर रहा है। हाथियों के कॉरिडोर की सुरक्षा और ग्रामीणों के लिए त्वरित मुआवजा प्रणाली को सुदृढ़ किया जा रहा है। आने वाले दिनों में और भी बड़ी रिकवरी संभव है। पुलिस ने साफ किया है कि नशे के खिलाफ यह अभियान अनवरत जारी रहेगा। अगर स्थिति और बिगड़ती है, तो विभाग को केंद्र सरकार से मदद मांगनी पड़ सकती है।

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