रायपुर। ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित प्रख्यात साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल का निधन हो गया है। उन्होंने 88 वर्ष की उम्र में अंतिम सांस ली। वे लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे और रायपुर एम्स में उनका इलाज चल रहा था।
विनोद कुमार शुक्ल हिंदी साहित्य के उन विशिष्ट रचनाकारों में गिने जाते हैं, जिन्होंने अपनी सरल भाषा, गहरी संवेदना और अलग शैली से साहित्य जगत को नई दिशा दी। कविता, कहानी और उपन्यास—तीनों विधाओं में उन्होंने उल्लेखनीय योगदान दिया। उनकी रचनाओं में आम आदमी का जीवन, उसकी भावनाएं और सामाजिक यथार्थ बेहद सहजता से सामने आता है।
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उन्हें उनके अद्वितीय साहित्यिक योगदान के लिए देश के सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। इसके अलावा भी उन्हें कई प्रतिष्ठित पुरस्कार प्राप्त हुए थे।
विनोद कुमार शुक्ल के निधन से साहित्य जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। साहित्यकारों, पाठकों और सांस्कृतिक जगत से जुड़े लोगों ने उनके निधन को अपूरणीय क्षति बताया है। उनके जाने से हिंदी साहित्य ने एक संवेदनशील और मौलिक आवाज खो दी है।



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