पुराने सिस्टम को क्यों बदलना पड़ा?
वर्तमान में अधिकांश जेलों में लगे जैमर केवल 2जी नेटवर्क को ब्लॉक करने में सक्षम हैं। कैदी अब 4जी सिम और 5जी स्मार्टफोन का उपयोग कर रहे हैं, जिनकी फ्रीक्वेंसी इन पुराने जैमर्स की रेंज से बाहर है। अधिकारी अब Harmonious Call Blocking System (HCBS) और ‘नॉइज़ टेक्नोलॉजी’ जैसे उन्नत विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। इस नई प्रणाली से न केवल वॉयस कॉल, बल्कि व्हाट्सएप और अन्य इंटरनेट आधारित संचार सेवाओं को भी पूरी तरह ठप किया जा सकेगा। जेल मुख्यालय के अधिकारी इस संबंध में तकनीकी विशेषज्ञों और कंपनियों से जानकारी जुटा रहे हैं।
तिहाड़ और यरवदा का ‘मॉडल’ होगा लागू
जेल प्रशासन उन सफल मॉडलों का अध्ययन कर रहा है जहां हाई-प्रोफाइल अपराधियों पर नकेल कसने के लिए विशेष टॉवर लगाए गए हैं। नई तकनीक में इस बात का भी ध्यान रखा जाएगा कि जैमर की रेंज केवल जेल परिसर तक सीमित रहे। अक्सर यह देखा गया है कि शक्तिशाली जैमर्स के कारण जेल के आसपास रहने वाले आम नागरिकों का मोबाइल नेटवर्क भी बाधित होता है। नई तकनीक में सिग्नल को सटीक रूप से बाउंड्री वाल के भीतर ही ब्लॉक करने की सुविधा होगी।
“तकनीक बदल रही है और कैदी इसका फायदा उठा रहे हैं। हमारे पुराने 2जी जैमर अब अप्रभावी हो चुके हैं। हम 5जी तकनीक को ब्लॉक करने वाले सिस्टम पर काम कर रहे हैं ताकि जेल की सुरक्षा से कोई समझौता न हो।”
— [Senior Official Name], जेल महानिदेशक (DG Prisons)
इस अपग्रेडेशन के बाद जेलों के भीतर से फिरौती मांगने या गैंग संचालित करने वाली गतिविधियों पर लगाम लगेगी। अगले चरण में जेल मुख्यालय शासन को बजट का प्रस्ताव भेजेगा। जैमर अपग्रेड होने के साथ-साथ जेलों में CCTV सर्विलांस और बॉडी वार्न कैमरों का जाल भी बिछाया जा रहा है। आसपास के निवासियों के लिए राहत की बात यह है कि नई तकनीक ‘फोकस्ड बीम’ पर आधारित होगी, जिससे जेल के बाहर के मोबाइल सिग्नल पर कोई बुरा असर नहीं पड़ेगा।

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