इस्लामाबाद/वॉशिंगटन: ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव को कम करने के लिए कूटनीतिक सक्रियता चरम पर है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने पिछले 48 घंटों में तीसरी बार पाकिस्तान का दौरा किया है। यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को खोलने के बदले अमेरिका से अपनी नाकेबंदी खत्म करने और युद्ध रोकने का प्रस्ताव रखा है। हालांकि, अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump’ ने इस प्रस्ताव पर असंतोष जाहिर किया है।
अराघची की ‘डिप्लोमैटिक शटल’: 48 घंटे में तीन दौरे
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची पिछले दो दिनों से लगातार पाकिस्तान और रूस के बीच सक्रिय हैं। कूटनीतिक गलियारों में इसे ईरान की ओर से अमेरिका के साथ जारी संघर्ष को समाप्त करने की एक बड़ी पहल के रूप में देखा जा रहा है।
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पाकिस्तान की भूमिका: पाकिस्तान को ईरान और अमेरिका के बीच एक प्रमुख मध्यस्थ (Mediator) के रूप में देखा जा रहा है। अराघची ने पाकिस्तान के शीर्ष नेतृत्व के साथ मुलाकात कर ईरान का संदेश वाशिंगटन तक पहुँचाने की कोशिश की है।
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रूस का समर्थन: पाकिस्तान और ओमान के बीच अपनी यात्राओं के दौरान, अराघची ने रूस का भी दौरा किया, जहाँ उन्होंने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की। रूस ने ईरान के हितों का समर्थन करने और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए हरसंभव मदद का भरोसा दिया है।
क्या है ‘होर्मुज’ का विवाद और ट्रंप की नाराजगी?
ईरान ने एक नया प्रस्ताव पेश किया है, जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की बात कही गई है, जो फिलहाल युद्ध के कारण ठप पड़ा है। ईरान की शर्त यह है कि अमेरिका इसके बदले में ईरान पर लगी समुद्री नाकेबंदी को हटाए और युद्ध को समाप्त करे।
ट्रंप का रुख:
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस प्रस्ताव को लेकर नाराजगी जताई है। रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप इस बात से खुश नहीं हैं कि ईरान इस प्रस्ताव में अपने परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत को फिलहाल टालना चाहता है।
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ट्रंप का संदेश: ट्रंप प्रशासन का स्पष्ट कहना है कि ईरान का परमाणु हथियारों से लैस होना अमेरिका को स्वीकार्य नहीं है। वे चाहते हैं कि किसी भी समझौते में परमाणु कार्यक्रम का मुद्दा प्राथमिकता पर हो।
तनाव और भविष्य की चुनौतियां
दोनों देशों के बीच फिलहाल सीजफायर जारी है, जो एक सकारात्मक संकेत है। लेकिन, विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी और परमाणु वार्ता पर असहमति ने इस शांति प्रक्रिया को नाजुक मोड़ पर खड़ा कर दिया है।

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