प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर सीधे प्रहार: रणनीतिक नुकसान
ईरान की ओर से दागी गईं मिसाइलों ने सीधे एयर बेस के उस हिस्से को निशाना बनाया जहाँ टैंकर विमान तैनात थे। ये विमान अमेरिकी लड़ाकू विमानों को हवा में ईंधन भरने में मदद करते हैं। इनके तबाह होने से इलाके में अमेरिकी वायुसेना की परिचालन क्षमता को बड़ा झटका लगा है। अधिकारियों के मुताबिक, हमले के समय ये विमान उड़ान भरने की तैयारी में थे।
मिसाइलें बेस के सुरक्षा कवच को भेदने में सफल रहीं। हमले के तुरंत बाद एयर बेस पर सायरन बजने लगे और सैनिकों को बंकरों में शरण लेनी पड़ी। पेंटागन वर्तमान में नुकसान का सटीक आकलन कर रहा है। अभी तक किसी सैनिक के हताहत होने की आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई है।
“ईरान का यह हमला उकसावे की चरम सीमा है। हमारे रणनीतिक विमानों को निशाना बनाना यह दर्शाता है कि संघर्ष अब नियंत्रित दायरे से बाहर जा रहा है। हम अपनी संपत्ति और सहयोगियों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं।”
— अमेरिकी रक्षा अधिकारी (पेंटागन सूत्र)
इस हमले का असर केवल सीमा तक सीमित नहीं रहेगा। सऊदी अरब और ईरान के बीच बढ़ता तनाव वैश्विक बाजार और आम नागरिकों को सीधे प्रभावित करेगा:
- तेल की कीमतों में उछाल: खाड़ी देशों में अस्थिरता से कच्चे तेल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी तय है। इसका सीधा असर भारत में पेट्रोल-डीजल की दरों पर पड़ेगा।
- हवाई मार्ग प्रभावित: कई अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस ने खाड़ी देशों के ऊपर से उड़ान भरना बंद कर दिया है। इससे अंतरराष्ट्रीय यात्रा महंगी और लंबी हो सकती है।
- प्रवासियों की चिंता: सऊदी अरब में रहने वाले लाखों भारतीय प्रवासियों के लिए सुरक्षा अलर्ट जारी किया जा सकता है।
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाई है। कयास लगाए जा रहे हैं कि अमेरिका ईरान के मिसाइल ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई कर सकता है। स्थिति बेहद तनावपूर्ण बनी हुई है और क्षेत्रीय युद्ध का खतरा बढ़ गया है।

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