नई दिल्ली | भारत और यूरोपीय संघ (European Union) के बीच जिस पल का इंतजार पिछले 18 सालों से हो रहा था, वह आखिरकार आ गया है। भारत और EU ने ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस समझौते को ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ (Mother of All Deals) करार दिया है।
वर्ष 2007 से अटकी यह बातचीत अब जाकर 2025-26 में सफल हुई है। इस समझौते से भारत में यूरोपीय सामानों की कीमतें काफी कम होने की उम्मीद है, जिसका सीधा फायदा भारतीय उपभोक्ताओं को मिलेगा।
पीएम मोदी बोले- यह दुनिया की दो बड़ी ताकतों का मिलन
समझौते की घोषणा करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि यह केवल एक व्यापारिक समझौता नहीं, बल्कि दुनिया की दो विशाल अर्थव्यवस्थाओं के बीच तालमेल का एक शानदार उदाहरण है।
“यह ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ है। यह समझौता ग्लोबल GDP के करीब 25% और ग्लोबल ट्रेड के लगभग एक-तिहाई (1/3) हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है। इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक रूप से पड़ेगा।” — नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री
अब क्या-क्या होगा सस्ता? (संभावित लिस्ट)
इस समझौते (FTA) का सबसे बड़ा असर ‘इंपोर्ट ड्यूटी’ (आयात शुल्क) कम होने या खत्म होने के रूप में दिखेगा। यूरोप से आने वाली कई प्रीमियम और लग्जरी चीजें भारतीय बाजार में सस्ती हो जाएंगी। जानकारों के मुताबिक, इन चीजों के दाम गिर सकते हैं:
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लग्जरी कारें: जर्मनी और यूरोप की बड़ी कार कंपनियां (जैसे- Audi, BMW, Mercedes) जो भारत में अपनी गाड़ियां भेजती हैं, उन पर लगने वाला भारी टैक्स कम होगा, जिससे गाड़ियां सस्ती होंगी।
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विदेशी शराब (Wines & Spirits): स्कॉच व्हिस्की और फ्रांस-इटली की महंगी वाइन पर आयात शुल्क 150% तक लगता था, जिसमें भारी कटौती होगी।
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चॉकलेट और डेरी उत्पाद: यूरोप की मशहूर चॉकलेट, चीज (Cheese) और अन्य प्रोसेस्ड फूड आइटम सस्ते होंगे।
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कॉस्मेटिक्स और फैशन: यूरोपीय ब्रांड्स के कपड़े, घड़ियां, परफ्यूम और ब्यूटी प्रोडक्ट्स की कीमतें कम हो सकती हैं।
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मशीनरी और टेक्नोलॉजी: उद्योगों में इस्तेमाल होने वाली यूरोपीय मशीनें सस्ती होंगी, जिससे ‘मेक इन इंडिया’ को भी बूस्ट मिलेगा।
भारत को क्या फायदा?
सिर्फ यूरोप का सामान ही भारत नहीं आएगा, बल्कि भारत के टेक्सटाइल (कपड़ा उद्योग), लेदर, जेम्स एंड ज्वेलरी और आईटी सेक्टर के लिए यूरोप का विशाल बाजार बिना किसी बाधा के खुल जाएगा। इससे भारत के निर्यात (Export) में रिकॉर्ड बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।
18 साल का लंबा सफर
दोनों पक्षों के बीच बातचीत 2007 में शुरू हुई थी, लेकिन कई मुद्दों (जैसे- शराब पर टैक्स, डेटा सुरक्षा और ऑटोमोबाइल सेक्टर) पर बात अटकती रही। आखिरकार, लंबी कूटनीतिक कोशिशों के बाद 18 साल पुराना यह सपना सच हो गया है।



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