रायपुर, छत्तीसगढ़: राज्य में सेवानिवृत्त दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों ने अपनी पेंशन संबंधी महत्वपूर्ण मांगों को लेकर एक बार फिर आवाज उठाई है। उनकी प्रमुख मांग है कि पेंशन की गणना करते समय उनके संपूर्ण सेवाकाल को शामिल किया जाए, न कि केवल नियमितीकरण के बाद की अवधि को। इस मांग के पूरा होने से हजारों कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के बाद वित्तीय सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन मिल सकेगा।
पेंशन महासभा के प्रांताध्यक्ष, वीरेंद्र नामदेव ने राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है। उनका आरोप है कि सेवानिवृत्त दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों की समस्याओं के निराकरण में अधिकारी टालमटोल कर रहे हैं और उनकी मांगों पर कोई गंभीर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। नामदेव ने सभी कर्मचारियों से इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर एकजुट होकर आंदोलन के लिए तैयार रहने का आह्वान किया है, ताकि उनकी मांगों को मजबूती से सरकार तक पहुंचाया जा सके।
सेवानिवृत्त दैनिक वेतन भोगी प्रकाश प्रदेश संयोजक अनिल पाटक ने बताया कि राज्य में ऐसे कई कर्मचारी हैं जिन्होंने 40 साल तक सेवा की है, लेकिन नियमितीकरण की तिथि से पेंशन गणना होने के कारण उन्हें न्यूनतम पेंशन के रूप में मात्र 7,550 रुपये मिलते हैं। यह राशि बढ़ती महंगाई और जीवन-यापन के खर्चों को देखते हुए अपर्याप्त है। उन्होंने तर्क दिया कि जब पेंशन के लिए 33 वर्ष की क्वालिफाइंग सेवा की शर्त पूरी नहीं होती, तो दैनिक वेतन भोगी के रूप में की गई सेवा अवधि को जोड़कर इसे पूरा किया जा सकता है, जो कि मौजूदा नियमों के विपरीत नहीं है।
इस मांग के पूरा होने से जल संसाधन, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा और वन विभाग जैसे महत्वपूर्ण विभागों में कार्यरत हजारों सेवानिवृत्त कर्मचारियों को सीधा लाभ मिलेगा। यह न केवल उनके वित्तीय लाभों को बढ़ाएगा, बल्कि उन्हें अवकाश नकदीकरण और उपदान जैसे अन्य सेवानिवृत्ति लाभों की भी पात्रता प्रदान करेगा, जो वर्तमान में उन्हें नहीं मिल पा रहे हैं।
हाल ही में हुई एक बैठक में सेवानिवृत्त दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी प्रकोष्ठ के पदाधिकारी और अन्य सदस्यों ने अपनी समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की। इस बैठक में कोषाध्यक्ष बीएस दशमेर, रायपुर अध्यक्ष आरजी बोहरे, सरगुजा संभाग अध्यक्ष गुरुचरण सिंह, और विनोद जैन जैसे प्रमुख सदस्यों ने अपने विचार व्यक्त किए और सरकार से जल्द से जल्द उनकी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई करने की अपील की। उनका मानना है कि सरकार को कर्मचारियों की वर्षों की सेवा का सम्मान करते हुए उनके संपूर्ण सेवाकाल को पेंशन गणना में शामिल कर उनके जीवन स्तर में सुधार करना चाहिए।

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