IMD 151st Foundation Day , नई दिल्ली। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने गुरुवार को अपने 151वें स्थापना दिवस पर मौसम पूर्वानुमान और आपदा प्रबंधन को और मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम उठाया। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने भविष्य की मौसम सेवाओं की विस्तृत रूपरेखा पेश करते हुए कई बड़ी घोषणाएं कीं। उन्होंने कहा कि बदलते जलवायु परिदृश्य और बढ़ती प्राकृतिक आपदाओं को देखते हुए मौसम की सटीक और समय पर जानकारी बेहद जरूरी हो गई है।
Dhanush : धनुष और मृणाल ठाकुर की शादी की खबरें तेज, 14 फरवरी बताई जा रही तारीख
डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि सरकार IMD की पहुंच और प्रभाव को बढ़ाने के लिए देशभर में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और नए क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र स्थापित करेगी। इसके साथ ही आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित प्रणालियों को मौसम पूर्वानुमान में शामिल किया जाएगा, जिससे भविष्यवाणियां और अधिक सटीक बन सकेंगी।
केंद्रीय मंत्री ने यह भी घोषणा की कि वर्ष 2026 में दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और पुणे जैसे प्रमुख महानगरों में कुल 200 ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन लगाए जाएंगे। प्रत्येक शहर में 50-50 ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। इन स्टेशनों के माध्यम से तापमान, वर्षा, आर्द्रता, हवा की गति और दिशा जैसे महत्वपूर्ण मौसमीय आंकड़े रियल टाइम में उपलब्ध कराए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि ऑटोमैटिक वेदर स्टेशनों की संख्या बढ़ने से शहरी क्षेत्रों में लोकल वेदर फोरकास्ट काफी बेहतर होगा। इससे हीटवेव, भारी बारिश, बाढ़, चक्रवात और अन्य मौसम संबंधी आपदाओं की पहले से सटीक चेतावनी दी जा सकेगी। इसका सीधा लाभ आम जनता के साथ-साथ किसानों, विमानन, रेल, बंदरगाह, आपदा प्रबंधन एजेंसियों और नगर प्रशासन को मिलेगा।
डॉ. सिंह ने IMD की 151 वर्षों की यात्रा को याद करते हुए कहा कि यह विभाग देश की मौसम निगरानी की रीढ़ रहा है। आज IMD न केवल मौसम पूर्वानुमान तक सीमित है, बल्कि जलवायु परिवर्तन, आपदा प्रबंधन और सतत विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

More Stories
Rajnath Singh Kargil Vijay Diwas Speech : द्रास से राजनाथ सिंह का पाकिस्तान पर निशाना, बोले- भारत तकनीक से आगे बढ़ रहा, पड़ोसी आतंकवाद में उलझा
Greater Noida STP tank accident : जहरीली गैस से सफाईकर्मी और गार्ड की मौत
27th Anniversary of the Kargil War : कारगिल विजय के 27 साल – जल, थल और नभ में पहले से कहीं ज्यादा ताकतवर हुआ भारत