अमलीडीह में पानी की बर्बादी: ‘जल है तो कल है’ सिर्फ नारा?
रायपुर: भीषण गर्मी का सितम जारी है, और ऐसे में पानी की एक-एक बूँद कीमती है। ‘जल है तो कल है’ और ‘जल ही जीवन है’ जैसे नारे हम बचपन से सुनते आ रहे हैं, जो जल संरक्षण के महत्व को दर्शाते हैं। जल, सफाई और बिजली के प्रबंधन की प्राथमिक जिम्मेदारी स्थानीय सरकारों, चाहे वह पंचायत हो, नगर पंचायत हो या नगरीय निकाय, की होती है। यही निकाय जल आपूर्ति के व्यवस्थापक हैं, और इन्हीं पर नागरिकों को स्वच्छ और पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने का जिम्मा है।
हालांकि, जमीनी हकीकत कुछ और ही बयाँ करती है। रायपुर के अमलीडीह से पुलिस कॉलोनी मुख्य मार्ग पर स्थित वरण अपार्टमेंट सोसाइटी और महात्मा गांधी नगर के ठीक बीच में, लगभग 100 मीटर के दायरे में, तीन अलग-अलग स्थानों से प्रतिदिन हजारों लीटर पानी व्यर्थ बह रहा है। यह बर्बादी ऐसे समय में हो रही है जब शहर के कई हिस्सों में पानी की किल्लत है और लोग बूंद-बूंद के लिए तरस रहे हैं। आश्चर्य की बात यह है कि इस गंभीर समस्या पर नगर निगम का ध्यान नहीं है और न ही इसकी सुध लेने की फुर्सत।
यह स्थिति स्थानीय प्रशासन की घोर लापरवाही को उजागर करती है। एक तरफ हम जल संरक्षण की बातें करते हैं, स्लोगन गढ़ते हैं, वहीं दूसरी ओर जिम्मेदार निकाय ही पानी की इस खुली बर्बादी को अनदेखा कर रहे हैं। इस ग्रीष्मकालीन मौसम में जब भूजल स्तर लगातार गिर रहा है और आने वाले समय में जल संकट और गहराने की आशंका है, तब यह बर्बादी चिंता का विषय है।
आज नहीं तो कल की सोचिए,
भीषण गर्मी में बंद नल की सोचिए।
यह सिर्फ एक चेतावनी नहीं, बल्कि एक हकीकत है जिसका सामना हमें निकट भविष्य में करना पड़ सकता है। नगर निगम को तुरंत इस ओर ध्यान देना चाहिए और अमलीडीह में हो रही पानी की बर्बादी को रोकना चाहिए ताकि ‘जल है तो कल है’ सिर्फ नारा न रहकर एक सच्चाई बन सके।

More Stories
Raipur Police Commissionerate 14 June 2026: 24 घंटे में राजधानी के सभी थानों का विस्तृत ब्योरा, अवैध शराब तस्करों से लेकर गबन के आरोपियों पर कसा शिकंजा
CG NEWS : छत्तीसगढ़ में रेत खदानों पर बड़ा फैसला, अब निगम और कंपनियों को भी मिलेगा संचालन का अधिकार
NHM कर्मचारियों को बड़ी सौगात’ 33 दिनों की हड़ताल अवधि का वेतन देने की घोषणा, Vishnu Deo Sai’ ने किया ऐलान