- बड़ी उपलब्धि: सुकमा-बीजापुर बॉर्डर पर स्थित पुवर्ती गांव में CRPF ने देश का पहला ‘IED और BGL पार्क’ तैयार किया।
- इतिहास का अंत: 19 अक्टूबर 2025 को मारे गए नक्सली कमांडर माड़वी हिड़मा के गांव में अब सेना का नियंत्रण।
- शिक्षा और सुरक्षा: पार्क में नक्सलियों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले 11 BGL सेल और घातक पाइप बम प्रदर्शित।
IED BGL Park Chhattisgarh बीजापुर/सुकमा — छत्तीसगढ़ के सबसे संवेदनशील इलाकों में से एक, पुवर्ती अब अपनी पहचान बदल रहा है। जिसे कभी नक्सलियों का ‘अभेद्य किला’ कहा जाता था, वहां अब CRPF की 150वीं बटालियन के कैंप में एक अनोखा पार्क बना है। यह कोई आम मनोरंजन पार्क नहीं है; यहां झूलों की जगह वो घातक हथियार और बम रखे गए हैं, जिनसे माओवादी सुरक्षा बलों और निर्दोष ग्रामीणों को निशाना बनाते थे।
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आतंक के गढ़ में बहादुरी की प्रदर्शनी
15 फरवरी 2024 को जब सुरक्षा बलों ने पुवर्ती में कदम रखा, तो नक्सलियों ने इसे रोकने के लिए पूरी ताकत झोंक दी थी। भारी गोलीबारी और हमलों के बीच जवानों ने न केवल पैर जमाए, बल्कि इलाके की सर्चिंग के दौरान बड़ी मात्रा में विस्फोटक बरामद किए। इन्हीं बरामद हथियारों को अब सुरक्षित तरीके से इस पार्क में सजाया गया है।
इस पार्क के निर्माण का मुख्य उद्देश्य जवानों को ट्रेनिंग देना और लोगों को यह बताना है कि नक्सली किस तरह के आईईडी (IED) और बीजीएल (BGL) का इस्तेमाल करते हैं।
- 11 BGL सेल्स: बैरल ग्रेनेड लॉन्चर के गोले जो दूर से हमला करने के काम आते थे।
- पाइप डायरेक्शन बम: जवानों को एंबुश में फंसाने के लिए इस्तेमाल होने वाला घातक हथियार।
- स्पाइक होल्स: जमीन में गाड़े गए लोहे के नुकीले तीर, जो गश्त कर रहे जवानों के पैरों को जख्मी करते थे।
हिड़मा का अंत और पुवर्ती का नया चेहरा
पुवर्ती गांव कुख्यात माओवादी कमांडर माड़वी हिड़मा का घर रहा है। हिड़मा, जो पीएलजीए (PLGA) बटालियन नंबर-1 का प्रमुख था, कई बड़े हमलों का मास्टरमाइंड था। 19 अक्टूबर 2025 को आंध्रप्रदेश के मारेडपल्ली में एक मुठभेड़ के दौरान सुरक्षा बलों ने उसे ढेर कर दिया।
“यह पार्क केवल हथियारों का संग्रह नहीं है, बल्कि यह उस विचारधारा की हार का प्रतीक है जिसने बस्तर को दशकों पीछे धकेला। हम चाहते हैं कि आने वाली पीढ़ी देखे कि शांति के लिए हमारे जवानों ने किन खतरों का सामना किया है।”
— कैंप के एक वरिष्ठ अधिकारी
हिड़मा की मौत और पुवर्ती में कैंप की मजबूती ने नक्सलियों के सप्लाई नेटवर्क को तोड़ दिया है। अब इस इलाके में सड़क निर्माण और शिक्षा पर ध्यान दिया जा रहा है। आईईडी पार्क का बनना यह संदेश देता है कि अब बमों का डर खत्म हो रहा है और वे केवल ‘प्रदर्शनी की वस्तु’ बनकर रह गए हैं।

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