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France and Britain gear up for Hormuz security; joint mission to clear mines.

France and Britain gear up for Hormuz security; joint mission to clear mines.

Hormuz Strait Security : ग्लोबल ऑयल रूट की सुरक्षा पर बड़ा कदम, फ्रांस ने होर्मुज में बढ़ाई नौसैनिक ताकत

नई दिल्ली: Hormuz Strait Security को लेकर मिडिल ईस्ट में तेजी से बदलते हालात के बीच फ्रांस ने बड़ा सैन्य कदम उठाया है। समुद्री व्यापार की सुरक्षा और जहाजों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए फ्रांस ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में अपने Mine Countermeasure Assets तैनात कर दिए हैं। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने घोषणा की कि फ्रांस ने दो माइनहंटर, दो फ्रिगेट और एक समुद्री गश्ती विमान क्षेत्र में भेजे हैं। इनका उद्देश्य समुद्री मार्ग को सुरक्षित रखना, संभावित बारूदी सुरंगों (Sea Mines) के खतरे को खत्म करना और अंतरराष्ट्रीय नौवहन को सामान्य बनाए रखना है।

France and Britain gear up for Hormuz security; joint mission to clear mines.
France and Britain gear up for Hormuz security; joint mission to clear mines.

होर्मुज क्यों है दुनिया की सबसे अहम समुद्री लाइफलाइन?

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे व्यस्त और रणनीतिक समुद्री मार्गों में से एक है। खाड़ी देशों से निकलने वाला कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से दुनिया के अलग-अलग देशों तक पहुंचता है। यही वजह है कि ब्रिटेन और फ्रांस ने संयुक्त बयान में कहा कि “Hormuz Global Economy की जीवनरेखा है।” दोनों देशों ने इस जलमार्ग की सुरक्षा को वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताया।

फ्रांस ने क्या-क्या तैनात किया?

फ्रांस ने समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने के लिए निम्न सैन्य संसाधन तैनात किए हैं—

2 अत्याधुनिक Minehunter जहाज
2 Frigate युद्धपोत
1 Maritime Patrol Aircraft (समुद्री गश्ती विमान)

इन संसाधनों का मुख्य उद्देश्य समुद्र में बिछाई जा सकने वाली बारूदी सुरंगों की पहचान करना, उन्हें निष्क्रिय करना और व्यापारी जहाजों के लिए सुरक्षित रास्ता सुनिश्चित करना है।

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मैक्रों ने एक्स पर दी जानकारी

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि फ्रांस अपने सहयोगी देशों के साथ मिलकर होर्मुज में समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करेगा। उन्होंने कहा कि फ्रांस की तैनाती का उद्देश्य समुद्री नौवहन को सामान्य स्थिति में लाना और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा को मजबूत करना है।

मैक्रों ने कहा कि बदलते हालात को देखते हुए फ्रांस अपने सैन्य संसाधनों में लगातार आवश्यक बदलाव करता रहेगा ताकि क्षेत्र में स्थिरता बनी रहे।

अमेरिका-ईरान MoU को बताया सकारात्मक संकेत

मैक्रों ने अपने बयान में अमेरिका और ईरान के बीच हुए MoU को क्षेत्रीय स्थिरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उनके अनुसार, इस समझौते से होर्मुज में समुद्री आवाजाही की स्वतंत्रता को मजबूती मिली है।

उन्होंने कहा कि ओमान के सुल्तान के साथ बातचीत के बाद फ्रांस ने अपनी सैन्य तैनाती की रणनीति में बदलाव करने का निर्णय लिया, ताकि मौजूदा हालात के अनुसार प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था कायम रखी जा सके।

चार्ल्स डी गॉल लौटेगा, लेकिन सुरक्षा अभियान रहेगा जारी

फ्रांस ने स्पष्ट किया है कि उसका विमानवाहक पोत Charles de Gaulle अब अपने होम पोर्ट टूलॉन वापस लौटेगा। हालांकि, माइन काउंटरमेजर जहाज, फ्रिगेट और अन्य सुरक्षा संसाधन स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तैनात रहेंगे और सहयोगी देशों के साथ मिलकर सुरक्षा अभियान जारी रखेंगे।

ब्रिटेन और फ्रांस का संयुक्त बयान

ब्रिटेन और फ्रांस ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि होर्मुज की सुरक्षा केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक आर्थिक स्थिरता से जुड़ा मुद्दा है। दोनों देशों ने कहा कि ओमान भी क्षेत्रीय समुद्री जल की सुरक्षा को लेकर उनके साथ सहयोग करने पर सहमत हुआ है।

संयुक्त बयान में यह भी कहा गया कि यदि भविष्य में जरूरत पड़ी तो दोनों देश Multinational Military Mission भी तैनात करने के लिए तैयार हैं।

समुद्री व्यापार पर क्यों है पूरी दुनिया की नजर?

विशेषज्ञों के अनुसार दुनिया के ऊर्जा व्यापार का बड़ा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। ऐसे में यदि इस मार्ग में किसी प्रकार की बाधा आती है तो तेल और गैस की वैश्विक सप्लाई प्रभावित हो सकती है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल, शिपिंग लागत में वृद्धि और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर व्यापक असर पड़ सकता है।

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अंतरराष्ट्रीय कानून और नौवहन की स्वतंत्रता पर जोर

ब्रिटेन और फ्रांस ने अपने संयुक्त बयान में कहा कि वे अंतरराष्ट्रीय कानून, समुद्री नौवहन की स्वतंत्रता, क्षेत्रीय स्थिरता और सभी देशों की संप्रभुता के सम्मान के लिए प्रतिबद्ध हैं। दोनों देशों ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी संघर्ष को बढ़ाना नहीं बल्कि वैश्विक समुद्री व्यापार को सुरक्षित बनाए रखना है।

Hormuz Strait Security: आगे क्या?

मिडिल ईस्ट में बदलते सुरक्षा हालात के बीच फ्रांस और ब्रिटेन की यह संयुक्त रणनीति संकेत देती है कि आने वाले समय में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की सुरक्षा पर अंतरराष्ट्रीय सहयोग और बढ़ सकता है। यदि तनाव बढ़ता है तो बहुराष्ट्रीय सैन्य मिशन की तैनाती भी संभव है। फिलहाल फ्रांस ने अपने माइन काउंटरमेजर संसाधनों को सक्रिय रखते हुए यह संदेश दिया है कि दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण समुद्री लाइफलाइन की सुरक्षा उसके लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है।

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