श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर की ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर के हब्बा कदल इलाके में स्थित प्राचीन रघुनाथ मंदिर के कपाट गुरुवार को 36 साल के लंबे अंतराल के बाद श्रद्धालुओं के लिए आधिकारिक रूप से खोल दिए गए। राम नवमी के पावन अवसर पर आयोजित इस भव्य समारोह ने न केवल धार्मिक आस्था को पुनर्जीवित किया, बल्कि कश्मीर की साझा संस्कृति और भाईचारे की एक नई मिसाल भी पेश की।
भजन और मंत्रोच्चार से जीवंत हुआ झेलम का तट
झेलम नदी के किनारे स्थित इस ऐतिहासिक मंदिर को फूलों और रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया गया था। जैसे ही मंदिर के घंटे-घड़ियाल बजे, पूरे इलाके में एक भावनात्मक लहर दौड़ गई। वर्षों से वीरान पड़े परिसर में वैदिक मंत्रों के उच्चारण और भजनों की गूंज सुनाई दी। श्रद्धालुओं ने विशेष ‘शुद्धिकरण’ पूजा और हवन में भाग लिया।
भाईचारे की अनोखी मिसाल
इस समारोह की सबसे खास बात स्थानीय मुस्लिम निवासियों की सक्रिय भागीदारी रही। कई मुस्लिम परिवारों ने पूजा की सामग्री जुटाने में मदद की और अपने कश्मीरी पंडित भाइयों का स्वागत किया। स्थानीय निवासी गुलाम हसन ने कहा, “यह मंदिर हमारे बचपन की यादों का हिस्सा है। हम चाहते हैं कि हमारे पंडित भाई वापस आएं और हम पहले की तरह मिल-जुलकर रहें।”
“यह केवल एक मंदिर का खुलना नहीं है, बल्कि दिलों के जुड़ने की शुरुआत है। 36 साल बाद यहाँ राम नवमी मनाना एक सपने जैसा है।” > — भारत रैना, अध्यक्ष, रघुनाथ मंदिर समिति

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