High Court Decision : बिलासपुर। अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा है कि कोविड-19 महामारी के कारण प्रभावित हुई शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को आधार बनाकर किसी पात्र अभ्यर्थी की अनुकंपा नियुक्ति रोकना उचित नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया कि महामारी जैसी असाधारण परिस्थितियों का नुकसान अभ्यर्थी को नहीं उठाना चाहिए। इसके साथ ही संबंधित प्रकरण में नियुक्ति पर पुनर्विचार करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
क्या था पूरा मामला?
मामला ऐसे अभ्यर्थी से जुड़ा था, जिसने अपने परिजन के निधन के बाद अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया था। संबंधित विभाग ने नियुक्ति देने से यह कहते हुए इनकार कर दिया कि अभ्यर्थी के पास आवश्यक TET योग्यता उपलब्ध नहीं है। अभ्यर्थी का तर्क था कि कोविड-19 महामारी के दौरान परीक्षा आयोजित नहीं हो सकी, जिसके कारण वह समय पर पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण नहीं कर सका।
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हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने माना कि कोविड-19 एक असाधारण और अप्रत्याशित स्थिति थी, जिसने शिक्षा और भर्ती प्रक्रियाओं को व्यापक रूप से प्रभावित किया। अदालत ने कहा कि यदि किसी अभ्यर्थी को महामारी के कारण आयोजित न हो सकी परीक्षा की वजह से अवसर नहीं मिला, तो केवल उसी आधार पर उसे अनुकंपा नियुक्ति से वंचित करना न्यायसंगत नहीं माना जा सकता।
कोर्ट ने यह भी कहा कि अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य मृत कर्मचारी के परिवार को आर्थिक और सामाजिक संकट से राहत देना होता है। इसलिए ऐसे मामलों में नियमों की व्याख्या मानवीय दृष्टिकोण और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए की जानी चाहिए।
विभाग को दिए आवश्यक निर्देश
अदालत ने संबंधित विभाग को निर्देश दिया कि अभ्यर्थी के मामले पर पुनर्विचार करते हुए कानून और न्यायालय की टिप्पणियों के अनुरूप उचित निर्णय लिया जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि कोविड-19 जैसी परिस्थितियों के कारण किसी पात्र उम्मीदवार के साथ अन्याय न हो।
अन्य अभ्यर्थियों को भी मिल सकती है राहत
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला उन अभ्यर्थियों के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है, जिनकी नियुक्ति कोविड-19 के दौरान परीक्षा या अन्य औपचारिकताओं में आई बाधाओं के कारण प्रभावित हुई है। हालांकि प्रत्येक मामले का निर्णय उसके तथ्यों और संबंधित नियमों के आधार पर अलग-अलग किया जाएगा।
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में यह संकेत भी दिया कि प्रशासनिक निर्णय लेते समय असाधारण परिस्थितियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। न्यायालय का मानना है कि नियमों का पालन आवश्यक है, लेकिन उनके अनुप्रयोग में मानवीय संवेदनाओं और व्यावहारिक परिस्थितियों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। इस फैसले को अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण न्यायिक दृष्टांत के रूप में देखा जा रहा है।

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