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August 30, 2025

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27 July नगरीय निकायों में वार्ड विकास हेतु बनेंगी समितियाँ– सकारात्मक बदलाव की दिशा

शहरी (नगरीय) विकास को जनभागीदारी से जोड़ने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार एक महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। अब शहरी निकायों में मोहल्ला समितियों का गठन किया जाएगा। ये समितियां सिर्फ नाम की नहीं होंगी, बल्कि इन्हें वार्ड स्तर पर विकास कार्यों की योजना बनाने और उन पर निगरानी रखने का अधिकार होगा।

नगरीय निकायों में ‘मोहल्ला समितियां‘ – मुख्य बिंदु:

गठन का उद्देश्य:

क्या है उद्देश्य? इस पहल का मुख्य उद्देश्य स्थानीय लोगों को उनके वार्ड के विकास में सीधे तौर पर शामिल करना है। अक्सर, विकास योजनाएं ऊपर से तय होती हैं, जिनमें स्थानीय ज़रूरतों और प्राथमिकताओं की अनदेखी हो जाती है. मोहल्ला समितियां इस खाई को पाटने का काम करेंगी। वे अपने वार्ड की वास्तविक ज़रूरतों को बेहतर ढंग से समझ पाएंगी और उनके अनुसार विकास कार्यों का प्रस्ताव दे सकेंगी।

  • शहरी विकास को जनता से जोड़ना और वार्ड स्तर पर नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित करना।

  • कुल नगरीय निकाय: छत्तीसगढ़ राज्य के सभी 192 नगरीय निकायों में समितियों का गठन होगा।

  • सदस्य संख्या: प्रत्येक वार्ड में 10 सदस्यों की एक समिति बनेगी।

  • महिला प्रतिनिधित्व: समितियों में आधी (50%) सदस्य महिलाएं होंगी, जो महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देगा।

  • अन्य वर्गों की भागीदारी: अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) से भी सदस्य लिए जाएंगे, ताकि सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व हो सके।

समिति के प्रमुख कार्य:

कैसे काम करेंगी नगरीय समितियां? प्रत्येक वार्ड में गठित होने वाली इन समितियों में स्थानीय निवासी शामिल होंगे। ये नगरीय समितियां नियमित बैठकें करेंगी और वार्ड से संबंधित मुद्दों पर चर्चा करेंगी। इसमें सड़क, बिजली, पानी, सफाई, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं से जुड़े मुद्दे शामिल होंगे। समिति के सदस्य इन मुद्दों पर अपने विचार और सुझाव देंगे, जिसके आधार पर विकास कार्यों की रूपरेखा तैयार की जाएगी. इतना ही नहीं, समिति इन कार्यों की प्रगति पर भी नज़र रखेगी और यह सुनिश्चित करेगी कि गुणवत्तापूर्ण तरीके से काम हों।

  • वार्ड की समस्याओं (सड़क, सफाई, पानी, कचरा आदि) की पहचान करना।

  • नगर निगम/नगरपालिका को विकास कार्यों हेतु सुझाव देना।

  • सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी करना।

  • नागरिकों की शिकायतों को संबंधित विभाग तक पहुंचाना।

  • वार्ड स्तरीय विकास कार्यों की प्राथमिकता तय करना।

  • सामाजिक समरसता व सामुदायिक सहभागिता को बढ़ावा देना।

लाभ/फायदे:

क्या होगा फायदा? यह कदम शहरी (नगरीय) निकायों में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने में भी मदद करेगा। जब स्थानीय लोग सीधे तौर पर विकास कार्यों से जुड़ेंगे, तो भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की संभावना कम होगी. साथ ही, यह नागरिकों को अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों के प्रति अधिक जागरूक बनाएगा।

  • शहरी शासन में नागरिकों की सीधी भागीदारी सुनिश्चित होगी।

  • सभी वर्गों की आवाज सुनी जाएगी।

  • स्वच्छता और जनस्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ेगी।

  • महिलाओं और वंचित वर्गों की सहभागिता सुनिश्चित होगी।

  • विकास कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी।

वर्तमान स्थिति:

  • मोहल्ला समितियों के गठन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

  • इस संबंध में आदेश भी जारी हो चुके हैं।

इस पहल से नागरिकों को शहरी शासन में अपनी आवाज उठाने का अवसर मिलेगा, जिससे शहरी विकास में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी। प्रदेश भर में समितियों के गठन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और इसके लिए आदेश भी जारी हो चुके हैं। यह कदम शहरी क्षेत्रों में सुशासन और जन-केंद्रित विकास की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।

कुल मिलाकर, नगरीय मोहल्ला समितियों का गठन एक दूरदर्शी पहल है जो शहरी विकास को अधिक समावेशी और प्रभावी बनाएगी. यह स्थानीय स्वशासन की अवधारणा को मजबूत करेगा और लोगों को अपने शहर के भविष्य को आकार देने में सक्रिय भूमिका निभाने का अवसर देगा।

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