वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने देश में लगातार बढ़ रहे साइबर फ्रॉड के मामलों के मद्देनजर सभी सरकारी बीमा कंपनियों को साइबर फ्रॉड से जुड़े जोखिमों को कवर करने वाले विशेष बीमा उत्पाद लाने का निर्देश दिया है। यह निर्देश ऐसे समय में आया है जब 2024 में देश में साइबर फ्रॉड की वजह से लोगों को 1.77 अरब रुपये का भारी नुकसान हुआ है, जो पिछले वर्ष की तुलना में दोगुना है।
सीतारमण ने बीमा कंपनियों से इंश्योरेंस क्षेत्र में ग्राहकों की जरूरतों पर ध्यान केंद्रित करते हुए नए उत्पाद बाजार में लाने की अपील की। उन्होंने विभिन्न प्रकार के साइबर उत्पाद तैयार करने और ग्राहक सेवा को बेहतर बनाने के लिए डिजिटल बदलाव को अपनाने पर जोर दिया। इसके अतिरिक्त, वित्त मंत्री ने सरकारी बीमा कंपनियों को इंटरनेट मीडिया से जुड़ने और ग्राहकों को आसान सेवाएं प्रदान करने के लिए कदम उठाने का सुझाव दिया।
भारतीय बीमा बाजार में प्रीमियम संग्रह में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। 2019 में यह 80,000 करोड़ रुपये था, जो 2024-25 में बढ़कर 1.06 लाख करोड़ रुपये हो गया है। हालांकि, प्रति व्यक्ति बीमा प्रीमियम के मामले में भारत अभी भी वैश्विक औसत से काफी पीछे है। वैश्विक स्तर पर यह 4.2 प्रतिशत है, जबकि भारत में प्रति व्यक्ति बीमा प्रीमियम 25 डॉलर है।
सरकारी बीमा कंपनियों के दावा अनुपात पर भी बात की गई, जो निजी कंपनियों की तुलना में अधिक पाया गया है। हालांकि, कोरोना काल की तुलना में इस अनुपात में कमी आई है। वर्ष 2021 में सरकारी कंपनियों का हेल्थ इंश्योरेंस दावा अनुपात 126 प्रतिशत था, जो 2023-24 में घटकर क्रमशः 103 प्रतिशत और 89 प्रतिशत रह गया है। यह सुधार बीमा क्षेत्र में बढ़ती दक्षता और बेहतर दावों के निपटान प्रक्रियाओं को दर्शाता है।
GST संग्रह के आंकड़ों पर नजर डालें तो मार्च, अप्रैल और मई 2025 में संग्रह में मजबूत वृद्धि देखी गई है। मार्च 2025 में GST संग्रह अपने लक्ष्य के करीब रहा। अप्रैल 2025 में GST संग्रह में भारी उछाल आया, जो मार्च की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि दर्शाता है। मई 2025 में भी GST संग्रह उच्च स्तर पर बना रहा, हालांकि यह अप्रैल के शिखर से थोड़ा कम था। यह डेटा अर्थव्यवस्था में सुधार और कर अनुपालन में वृद्धि का संकेत देता है, जो सरकारी राजस्व के लिए सकारात्मक रुझान है।

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