Fast Track Special Courts Scheme: महिलाओं और बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों से जुड़े मामलों में जल्द न्याय दिलाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (FTSC) योजना को अगले पांच साल तक जारी रखने की मंजूरी दे दी गई है। अब यह योजना 31 मार्च 2031 तक लागू रहेगी। सरकार के इस फैसले से रेप और पॉक्सो एक्ट से जुड़े लंबित मामलों की सुनवाई में तेजी आने की उम्मीद है।
इस योजना पर कुल 3,788.04 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसमें केंद्र सरकार 2,353.15 करोड़ रुपये और राज्य व केंद्र शासित प्रदेश 1,434.89 करोड़ रुपये का योगदान देंगे। केंद्र सरकार अपने हिस्से की राशि निर्भया फंड से उपलब्ध कराएगी।
850 तक बढ़ाई जाएंगी फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट
केंद्र सरकार ने देश में फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट की संख्या बढ़ाने का भी फैसला किया है। योजना के तहत अब कुल 850 फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट संचालित करने का लक्ष्य रखा गया है। फिलहाल देश में 779 FTSC काम कर रही हैं, जिनमें 399 स्पेशल पॉक्सो कोर्ट शामिल हैं।
नई व्यवस्था के तहत अतिरिक्त जिलों को भी इन अदालतों के दायरे में लाया जाएगा। इसके लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लंबित मामलों की संख्या को आधार बनाया जाएगा। इससे उन क्षेत्रों में भी पीड़ितों को जल्द न्याय मिलने में मदद मिलेगी, जहां यौन अपराधों से जुड़े मामलों का दबाव अधिक है।
स्पेशल जज और सरकारी वकीलों की होगी नियुक्ति
फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट योजना के तहत अदालतों में समर्पित न्यायिक अधिकारियों, स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर और छह सपोर्ट स्टाफ की व्यवस्था की जाएगी। प्रत्येक FTSC के लिए विशेष सरकारी वकील नियुक्त करने का प्रस्ताव है।
इसका उद्देश्य मामलों की सुनवाई को व्यवस्थित और तेज बनाना है। साथ ही पॉक्सो एक्ट, 2012 के तहत दर्ज रेप और यौन अपराधों से जुड़े लंबित मामलों का जल्द निपटारा करना है।
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पीड़ितों के लिए बनाए जाएंगे बच्चों के अनुकूल कोर्ट
इस योजना में सिर्फ मामलों की सुनवाई तेज करने पर ही नहीं, बल्कि पीड़ितों की सुविधा और सुरक्षा पर भी ध्यान दिया गया है। इसके तहत कमजोर गवाह बयान केंद्र और बच्चों के अनुकूल कोर्ट रूम की स्थापना को प्रोत्साहित किया जाएगा।
इससे खासतौर पर बच्चों और यौन अपराधों के पीड़ितों को बिना अतिरिक्त मानसिक परेशानी के अपनी गवाही देने में मदद मिलेगी। सरकार का उद्देश्य पीड़ितों को समयबद्ध न्याय उपलब्ध कराना और लंबित मामलों का बोझ कम करना है।
अब तक 4 लाख से ज्यादा मामलों का हो चुका है निपटारा
फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट योजना की शुरुआत 2 अक्टूबर 2019 को हुई थी। आपराधिक कानून (संशोधन) अधिनियम, 2018 के बाद और सुप्रीम कोर्ट के 25 जुलाई 2019 के निर्देशों के अनुपालन में इस योजना को शुरू किया गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने उन जिलों में समर्पित विशेष अदालतें स्थापित करने का निर्देश दिया था, जहां पॉक्सो एक्ट के तहत 100 से अधिक मामले लंबित थे।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, योजना शुरू होने के बाद से अब तक कुल 4,02,457 मामलों का निपटारा किया जा चुका है। शुरुआत में इस योजना को एक साल के लिए लागू किया गया था, लेकिन बाद में इसकी अवधि बढ़ाकर 31 मार्च 2026 कर दी गई थी। अब केंद्र सरकार ने इसे अगले पांच वर्षों यानी 31 मार्च 2031 तक जारी रखने का फैसला किया है।
FTSC योजना की निगरानी कैसे होगी?
इस योजना को न्याय विभाग (Department of Justice) संबंधित राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन के सहयोग से लागू करेगा। योजना की प्रगति पर नजर रखने के लिए FTSC डैशबोर्ड, समय-समय पर प्रोग्रेस रिपोर्ट और राज्यों के खर्च से जुड़ी जानकारी का इस्तेमाल किया जाएगा।
इसके अलावा न्याय विभाग हाईकोर्ट और राज्य सरकारों के साथ मिलकर योजना के क्रियान्वयन की समीक्षा करेगा। सरकार को उम्मीद है कि इस विस्तार से महिलाओं और बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों से जुड़े मामलों में न्यायिक प्रक्रिया मजबूत होगी और लंबित मामलों की संख्या घटाने में मदद मिलेगी।

