शुभ मुहूर्त और तिथि का सटीक समय
पंचांग गणना के अनुसार, फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि का प्रारंभ और समापन समय पूजा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। विनायक चतुर्थी की पूजा हमेशा मध्याह्न (दोपहर) के समय की जाती है।
- चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 21 फरवरी, 2026 को शाम से।
- चतुर्थी तिथि समाप्त: 22 फरवरी, 2026 को दोपहर तक।
- पूजा का श्रेष्ठ मुहूर्त: सुबह 11:25 से दोपहर 01:40 के बीच (स्थानीय समय अनुसार थोड़ा परिवर्तन संभव)।
पूजा विधि: कार्यों की सिद्धि के लिए ऐसे करें गणेश वंदन
विनायक चतुर्थी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान के बाद व्रत का संकल्प लें। भगवान गणेश की प्रतिमा के सामने धूप-दीप प्रज्वलित करें। गणेश जी को लाल सिंदूर का तिलक लगाएं। इसके बाद उन्हें 21 दूर्वा (घास) की गांठें अर्पित करें। मान्यताओं के अनुसार, दूर्वा गणेश जी को अत्यंत प्रिय है और इससे वे शीघ्र प्रसन्न होते हैं।
प्रसाद में मोदक या लड्डू का भोग लगाएं। ‘ओम गं गणपतये नमः’ मंत्र का जाप करते हुए आरती संपन्न करें। ध्यान रहे कि विनायक चतुर्थी के दिन चंद्रमा के दर्शन वर्जित माने जाते हैं, इसलिए रात के समय आकाश की ओर देखने से बचें।
“इस बार फाल्गुन विनायक चतुर्थी पर रवि योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का संगम हो रहा है। ऐसे में गणेश जी की आराधना से अटके हुए सरकारी काम और व्यापारिक बाधाएं दूर होंगी।”

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